संभल में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का खुलासा: क्या होगा इन 34 अवैध स्ट्रक्चर्स का?
उत्तर प्रदेश के संभल जिले के चंदौसी शहर में एक बड़े विवाद का पर्दाफाश हुआ है, जहां नगर पालिका की जमीन पर अवैध रूप से मस्जिद और मकानों का निर्माण किया गया है। इस मामले ने शहर में हलचल मचा दी है, खासकर जब यह बात सामने आई कि करीब साढ़े 6 बीघा सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है। अब जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया ने इस मुद्दे की गंभीरता को समझते हुए जांच के आदेश दिए हैं और मामले के सभी दस्तावेजों की सख्त पड़ताल की जाएगी।
संभल के डीएम राजेंद्र पेंसिया ने तहसील दिवस के दौरान इस मामले की जांच की और पाया कि वारिस नगर क्षेत्र में नगर पालिका की भूमि पर मस्जिद सहित 34 संरचनाएं अवैध रूप से बनी हैं। इसमें 33 मकान शामिल हैं। डीएम ने इस मामले की जांच तहसीलदार और एसडीएम को सौंप दी है और उन्होंने कहा कि यदि कोई अवैध कब्जा पाया जाता है तो उसे कानून के मुताबिक ध्वस्त कर दिया जाएगा।
नगर पालिका की शिकायत पर शुरू हुई कार्रवाई
यह विवाद तब सामने आया जब चंदौसी नगर पालिका ने तहसील प्रशासन को शिकायत दी कि वारिस नगर में स्थित रजा-ए-मुस्तफा मस्जिद और उसके आसपास बने मकान सरकारी संपत्ति पर बने हैं। इस शिकायत के बाद संभल के डीएम राजेंद्र पेंसिया और एसपी कृष्ण बिश्नोई मौके पर पहुंचे और पूरे इलाके का निरीक्षण किया। डीएम ने अपनी टीम के साथ स्थिति का जायजा लिया और पाया कि यह सरकारी भूमि थी, जिस पर अवैध निर्माण हुआ था।
डीएम पेंसिया ने कहा कि यह मामला पहले से तहसीलदार द्वारा जांचा जा रहा था, और रिपोर्ट उप-जिलाधिकारी को पहले ही सौंप दी गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी भी व्यक्ति ने इस भूमि पर कब्जा किया है या उसे बेचा है, तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। डीएम ने सख्त निर्देश दिए कि इस अवैध कब्जे को हटाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
राजनीतिक कनेक्शन और आगे की कार्रवाई
यह मामला राजनीतिक दृष्टि से भी अहम हो गया है, क्योंकि इस इलाके की निवासी योगी सरकार की मंत्री गुलाबो देवी हैं। हालांकि, इस समय मंत्री गुलाबो देवी का इस मामले में कोई प्रत्यक्ष रूप से बयान सामने नहीं आया है, लेकिन यह सवाल जरूर उठ रहा है कि क्या इस मामले की राजनीतिक दृष्टि से जांच की जाएगी और क्या इससे जुड़ी किसी भी ताकतवर हस्ती का नाम सामने आएगा।
डीएम पेंसिया ने स्पष्ट कहा कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का कब्जा करने या उसे बेचने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि तहसील दिवस के निरीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अवैध निर्माण पूरी तरह से हटाए जाएं और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा की जाए।
क्या होगा इन अवैध निर्माणों का?
इस समय सवाल यह उठ रहा है कि इन 34 अवैध संरचनाओं का क्या होगा। क्या इनका ध्वस्त करना संभव होगा या फिर इसमें कोई समझौता किया जाएगा? सरकार और प्रशासन की पूरी कोशिश होगी कि किसी भी अवैध कब्जे को कानून के अनुसार हटाया जाए, लेकिन इस पूरे मामले में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।
कुल मिलाकर, संभल में सरकारी जमीन पर हुए इस अवैध कब्जे ने शहर में हलचल मचाई है और यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या प्रशासन इस मामले में सख्ती से काम करेगा, और अगर हां, तो इन अवैध निर्माणों को खत्म करने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जाएंगे?
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