अंतरिक्ष की ऊंचाइयों को छूने वाली सुनीता विलियम्स की धरती पर वापसी, गांव में जश्न का माहौल
अंतरिक्ष की गहरी ऊंचाइयों को छूने वाली भारतीय मूल की नासा अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विल्मोर की पृथ्वी पर वापसी का रास्ता अब साफ हो गया है। लंबे समय से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर फंसे दोनों अंतरिक्ष यात्री अब जल्दी ही धरती पर लौटने वाले हैं। नासा ने उनके लिए एक स्पेशल स्पेसक्राफ्ट भेजा है, जो उनके सुरक्षित पृथ्वी पर लौटने की प्रक्रिया को जल्द पूरा करेगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों की वापसी 18 मार्च तक संभव हो सकती है, जो सुनीता और उनके परिवार के लिए बेहद खुशी का पल होगा।
तीसरी बार अंतरिक्ष यात्रा पर गईं सुनीता
सुनीता विलियम्स की यह तीसरी अंतरिक्ष यात्रा थी। इससे पहले, 2006 और 2012 में सुनीता ने दो बार अंतरिक्ष यात्रा की थी और कुल मिलाकर उन्होंने 322 दिन अंतरिक्ष में बिताए हैं। वह भारतीय मूल की दूसरी महिला अंतरिक्ष यात्री हैं, जिन्होंने नासा के जरिए अंतरिक्ष में कदम रखा, इससे पहले कल्पना चावला ने भी नासा के जरिए अंतरिक्ष मिशन में हिस्सा लिया था। उनकी वापसी का इंतजार उनके परिवार के साथ-साथ उनके पैतृक गांव में भी है, जहां विशेष प्रार्थनाएं हो रही हैं।
गुजरात के छोटे से गांव से जुड़ा है सुनीता का नाता
सुनीता का जन्म 19 सितंबर 1965 को अमेरिका के ओहियो राज्य के यूक्लिड शहर में हुआ था। उनके पिता डॉ. दीपक पंड्या और माता उर्सलीन बोनी हैं। उनके पिता गुजरात के मेहसाणा जिले के झुलासन गांव से ताल्लुक रखते हैं। 1957 में, उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई के लिए अमेरिका का रुख किया था और वहीं उर्सलीन से शादी की। सुनीता के साथ उनका गहरा जुड़ाव झुलासन गांव से है, जो अब उनके लिए सिर्फ एक घर नहीं बल्कि प्रेरणा का स्रोत बन चुका है।
झुलासन गांव में सुनीता के परिवार की विरासत
झुलासन गांव, जो गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित है और गांधीनगर से लगभग 40 किलोमीटर दूर है, सुनीता विलियम्स की जड़ों से जुड़ा हुआ है। गांव की आबादी लगभग 7,000 है और यह विभिन्न जातियों और समुदायों का घर है। सुनीता विलियम्स इस गांव से गहरी भावनात्मक जुड़ाव रखती हैं। वह पहले 2007 और फिर 2013 में अपने अंतरिक्ष अभियानों के बाद इस गांव का दौरा कर चुकी हैं। हर बार उनकी वापसी के दौरान गांव में खुशी और उत्साह का माहौल रहता है।
दादा-दादी की याद में बनी लाइब्रेरी
सुनीता विलियम्स के परिवार की कई संपत्तियां इस गांव में स्थित हैं। 1960 के दशक के अंत में, उनके दादा-दादी की याद में एक लाइब्रेरी का निर्माण किया गया था। यह लाइब्रेरी आज भी गांव में स्थित है और एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। उनके पिता का पैतृक घर भी गांव में मौजूद है, हालांकि अब यह जर्जर अवस्था में है। झुलासन गांव के स्कूल में सुनीता का नाम दानदाताओं की सूची में शामिल है, और 2007 में, जब वह यहां आई थीं, तो उन्होंने गांव के स्कूल के विकास के लिए 2.5 लाख रुपये का दान भी दिया था।
परिवार और वैवाहिक जीवन
सुनीता के परिवार में उनके माता-पिता के अलावा उनके दो बड़े भाई-बहन भी हैं – जय थॉमस पंड्या और डायना एन पंड्या। सुनीता विलियम्स की शादी माइकल जे. विलियम्स से हुई है, जो एक पायलट और टेक्सास में पुलिस अधिकारी हैं। माइकल अमेरिकी संघीय न्याय व्यवस्था के अंतर्गत एक फेडरल मार्शल भी हैं और पहले हेलीकॉप्टर पायलट के रूप में कार्य कर चुके हैं। दिलचस्प बात यह है कि वह हिंदू धर्म को मानते हैं, और उनके जीवन में भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण स्थान है।
झुलासन के लोग सुनीता को मानते हैं अपनी प्रेरणा
सुनीता विलियम्स को झुलासन गांव के लोग अपनी प्रेरणा मानते हैं। वह महिला अंतरिक्ष यात्रियों में सबसे लंबी अंतरिक्ष उड़ान का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी हैं, और उनके इस कार्य ने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को गौरवान्वित किया है। उनके सम्मान में गांव की लाइब्रेरी और स्कूलों में कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। जब भी वह किसी अंतरिक्ष मिशन पर जाती हैं, तो गांव के लोग उनकी सुरक्षा और सफलता के लिए प्रार्थना करते हैं। अब जब वह तीसरी बार अंतरिक्ष से धरती पर लौट रही हैं, तो झुलासन का गांव फिर से उनका स्वागत करने के लिए तैयार है।
वापसी के जश्न का इंतजार
सुनीता की वापसी केवल उनके परिवार और रिश्तेदारों के लिए ही नहीं, बल्कि उनके पैतृक गांव के लिए भी एक ऐतिहासिक घटना है। गांव में अब उनका स्वागत करने के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। सुनीता की सफलता न केवल अंतरिक्ष यात्रा के क्षेत्र में, बल्कि उनके परिवार और गांव के लिए भी एक प्रेरणा बन चुकी है। उनकी वापसी के साथ, झुलासन का गांव फिर से गौरव की नई ऊंचाइयों को छुएगा।
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