April 21, 2026

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को चैंपियंस ट्रॉफी से भारी नुकसान, खिलाड़ियों की सैलरी में कटौती!

2025 की चैंपियंस ट्रॉफी, जो पाकिस्तान में आयोजित होने वाला पहला वैश्विक क्रिकेट टूर्नामेंट था, पाकिस्तान क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक तो साबित हुआ, लेकिन साथ ही यह एक बड़ी मुसीबत बनकर उभरा। टूर्नामेंट के आयोजन से पीसीबी (पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड) को न केवल भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा, बल्कि इसके असर से पाकिस्तानी खिलाड़ियों को भी गंभीर परिणाम भुगतने पड़े हैं।

टूर्नामेंट की वित्तीय विफलता

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की योजना इस टूर्नामेंट से अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने की थी, लेकिन परिणाम इसके उलट रहे। द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, पीसीबी ने टूर्नामेंट के दौरान रावलपिंडी, लाहौर और कराची के स्टेडियमों के उन्नयन पर लगभग 18 अरब पाकिस्तानी रुपये (लगभग 58 मिलियन डॉलर) खर्च किए, जो कि उनके बजट का 50 प्रतिशत अधिक था। इसके अलावा, इवेंट की तैयारियों पर बोर्ड ने 40 मिलियन डॉलर खर्च किए थे, लेकिन टिकट बिक्री, स्पॉन्सरशिप और होस्टिंग फीस से सिर्फ 6 मिलियन डॉलर की ही वापसी हो पाई। इसके परिणामस्वरूप, पीसीबी को लगभग 85 मिलियन डॉलर (2383 करोड़ पाकिस्तानी रुपये) का भारी नुकसान हुआ।

खिलाड़ियों की सैलरी में कटौती

इस वित्तीय संकट का सीधा असर पाकिस्तान के क्रिकेट खिलाड़ियों पर पड़ा है। टूर्नामेंट के दौरान देश की टीम ने रावलपिंडी में बांग्लादेश के खिलाफ एक मैच खेला, जो बारिश के कारण रद्द हो गया। इसके बाद लाहौर में न्यूजीलैंड के खिलाफ एकमात्र मैच खेला गया, लेकिन टीम टूर्नामेंट से पहले ही बाहर हो गई। इसके बाद पीसीबी ने अपनी वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए खिलाड़ियों की सैलरी में भारी कटौती की।

रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय टी20 चैंपियनशिप में खिलाड़ियों की मैच फीस को 90 प्रतिशत तक घटा दिया गया है, जबकि रिजर्व खिलाड़ियों को मिलने वाली सैलरी में 87.5 प्रतिशत की कटौती की गई। जो खिलाड़ी पहले पांच सितारा होटलों में ठहरते थे, अब उन्हें बजट आवासों में रहना पड़ रहा है। जबकि क्रिकेट बोर्ड के अधिकारी लाखों की सैलरी ले रहे हैं, खिलाड़ी अपनी मेहनत के बावजूद इन कटौतियों का सामना कर रहे हैं।

खिलाड़ियों को कम मैच फीस का सामना

पाकिस्तानी अखबार ‘द डॉन’ ने एक रिपोर्ट में बताया कि पीसीबी ने हाल ही में बिना किसी आधिकारिक घोषणा के मैच फीस को 40,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये कर दिया। हालांकि, पीसीबी के चेयरमैन मोहसिन नकवी ने इस फैसले को रद्द कर दिया और बोर्ड के घरेलू क्रिकेट विभाग को मामले की समीक्षा करने का निर्देश दिया। इसके बावजूद, सूत्रों के अनुसार अब खिलाड़ियों को प्रति मैच 30,000 रुपये मिलने की संभावना है, जो पिछले साल के मुकाबले 10,000 रुपये कम है।

पीसीबी की आर्थिक स्थिति पर संकट

यह घटनाक्रम साफ तौर पर दिखाता है कि चैंपियंस ट्रॉफी के आयोजन के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। बोर्ड ने टूर्नामेंट के दौरान भारी निवेश किया था, लेकिन इससे कोई सकारात्मक वित्तीय परिणाम नहीं मिले। इसके बजाय, बोर्ड को भारी नुकसान उठाना पड़ा और इसके प्रभाव से पाकिस्तान के घरेलू क्रिकेट खिलाड़ियों की सैलरी में कटौती की गई।

अब यह देखना होगा कि पीसीबी अपनी वित्तीय स्थिति को कैसे संभालता है और क्या वह आगे चलकर इस तरह के वित्तीय संकट से बचने के लिए नए उपायों की शुरुआत करेगा। इस घटनाक्रम से यह भी स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को भविष्य में ऐसी आयोजनों से जुड़े वित्तीय जोखिमों को ध्यान में रखते हुए बेहतर योजना बनानी होगी।

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!