भारत में मोटापे की बढ़ती समस्या: जीवनशैली बदलने की आवश्यकता, पीएम मोदी ने किया ध्यान आकर्षित
बीते कुछ समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में बढ़ते मोटापे की समस्या पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इसे ‘तमाम बीमारियों की जड़’ करार दिया और साथ ही यह चेतावनी भी दी कि यदि इस पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में भारत में मोटापे की समस्या और गंभीर हो सकती है।
भारत में ओवरवेट और मोटापे के शिकार लोगों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्ष 2050 तक भारत में 44 करोड़ लोग मोटापे की गिरफ्त में होंगे। इसके साथ ही अगर जल्द ही जीवनशैली में बदलाव नहीं हुआ, तो भारत युवाओं में मोटापे की श्रेणी में चीन को भी पछाड़ सकता है। यह स्थिति गंभीर हो सकती है और इसके लिए हमें जल्दी से जल्दी राष्ट्रीय स्तर पर नीतियां तैयार करने की आवश्यकता है। हालांकि, मोटापे के उपचार के लिए अभी भी केवल 40 प्रतिशत देशों में ही नीतियां बनाई गई हैं, जिनमें से अधिकांश देशों की आय कम है।
मोटापे का उपचार अब दो मुख्य तरीकों से किया जा सकता है: पहला, स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसे बढ़ने से रोका जा सकता है और दूसरा, महंगे इलाज, दवाओं या सर्जरी के द्वारा इसका उपचार किया जा सकता है, लेकिन यह भी महंगा और कभी-कभी जोखिमपूर्ण हो सकता है।
भारतीय परंपराओं में निहित है सही पोषण और जीवनशैली
भारतीय परंपरा में खाने के तरीके और जीवनशैली के बारे में जो निर्देश दिए गए हैं, वे आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। ओएमएडी (वन मील ए डे) और वारियर डाइट जैसे डाइट प्लान्स अब ट्रेंड में हैं, लेकिन भारत में यह परंपरा पहले से ही प्रचलित रही है। भारतीय संस्कृति में लोग जीने के लिए भोजन करते थे, भोजन के लिए नहीं। इस प्रकार की जीवनशैली से शरीर को सही पोषण मिलता था और पाचन क्षमता मजबूत रहती थी।
आजकल के दौर में लोग अधिकतर दोपहर का भोजन पचने से पहले ही शाम को हैवी स्नैकिंग या फास्टफूड का सेवन कर लेते हैं, जो मोटापे का कारण बनता है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए यह जरूरी है कि भोजन का सही समय और सही मात्रा में सेवन किया जाए।
भोजन का श्रेष्ठ समय
स्वास्थ्य और संतुलन बनाए रखने के लिए विशेषज्ञों की सलाह है कि दिन में एक बार भोजन करें, वह भी दोपहर के समय, यानी 10 बजे से लेकर 2 बजे के बीच, जब पाचन शक्ति शिखर पर होती है। इस समय का भोजन शरीर के लिए अत्यंत लाभकारी होता है। यह शरीर को पोषण प्रदान करता है और आंतरिक उपवास का लाभ मिलता है।
इसके अलावा बच्चों को भी इस प्रकार की जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सकता है ताकि उनका स्वास्थ्य बेहतर रहे। मन को हल्का और स्वस्थ रखने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि हम अपने आहार और दिनचर्या में बदलाव करें।
स्वस्थ रहने का संकल्प
भारतीयों में मोटापा एक नई समस्या के रूप में उभरा है, क्योंकि हमने अधिक चिकनाई, मैदा, पैकेटबंद भोजन और प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन करना शुरू कर दिया है। साथ ही हमारी दिनचर्या भी पूरी तरह से बदल गई है, जिससे शरीर के जैविक clock का संतुलन बिगड़ गया है। यदि हम अपनी पारंपरिक जीवनशैली को अपनाएं और योगाभ्यास को अपनी दिनचर्या में शामिल करें तो यह शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होगा।
इसके अलावा, साइकिलिंग को भी अपनी दिनचर्या में शामिल करने से ना केवल स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि पर्यावरण भी स्वच्छ रहेगा। बच्चों को स्कूल जाने के लिए साइकिल का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है, जिससे ईंधन की खपत भी कम होगी और पर्यावरण को भी लाभ होगा।
समग्र रूप से, यदि हम अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करें और अपनी परंपराओं से जुड़े रहें, तो न केवल हम मोटापे को नियंत्रित कर सकते हैं, बल्कि अपने स्वास्थ्य को बेहतर भी बना सकते हैं।
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