दिल्ली एयरपोर्ट पर ‘खोया-पाया’ में चोरी का खेल! यात्रियों के बैग से गायब हुए 2,500 डॉलर
नई दिल्ली: इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) पर यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए काम करने वाले कर्मचारियों पर ही चोरी का गंभीर आरोप लगा है। दिल्ली पुलिस ने एयरपोर्ट के दो कर्मचारियों को यात्रियों के बैग से 2,500 डॉलर चोरी करने के मामले में गिरफ्तार किया है।
कैसे खुला यह बड़ा राज?
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान गौरव कुमार और प्रकाश चंद के रूप में हुई है, जो एयरपोर्ट के खोया-पाया विभाग (Lost & Found Department) में कार्यरत थे। मामला तब सामने आया जब एक अमेरिकी नागरिक और ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड धारक, रोशन पटेल, ने अपने बैग से पैसे गायब होने की शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 303(2) के तहत केस दर्ज किया है और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
क्या था पूरा मामला?
रोशन पटेल अमेरिका से दिल्ली आई थीं। उनके बैग में 2,500 डॉलर समेत कई अन्य कीमती सामान थे, लेकिन जब बैग उन्हें वापस मिला तो उसमें से पैसे गायब थे। बाद में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों ने उनका बैग बरामद कर खोया-पाया विभाग में जमा कर दिया। लेकिन जब बैग खोला गया, तो उसमें से नकदी गायब थी।
सीसीटीवी फुटेज ने खोली चोरी की पोल
शुरुआत में पुलिस को शक था कि बैग हवाई अड्डे के टर्मिनल या सुरक्षा जांच के दौरान चोरी हुआ होगा। लेकिन जब एयरपोर्ट पर लगे कई सीसीटीवी कैमरों की बारीकी से जांच की गई, तो यह साफ हो गया कि बैग के साथ टर्मिनल पर कोई छेड़छाड़ नहीं हुई थी।
इसके बाद पुलिस की जांच का रुख खोया-पाया विभाग की ओर मुड़ा, जहां बैग को जमा किया गया था। जब कर्मचारियों से पूछताछ की गई, तो गौरव कुमार और प्रकाश चंद पर शक गहरा गया।
कैसे पकड़े गए आरोपी?
शुरुआत में गौरव और प्रकाश ने चोरी की बात से इनकार किया, लेकिन जब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज सामने रखी, तो दोनों के पास कोई रास्ता नहीं बचा।
फुटेज में स्पष्ट रूप से दिखा कि दोनों कर्मचारी खोया-पाया कार्यालय के अंदर बैग खोलकर उसमें से पैसे निकाल रहे थे। पुलिस के अनुसार, दोनों ने चोरी कबूल कर ली और बताया कि उन्होंने 2,500 डॉलर को आपस में बांट लिया था।
कैसे हुई साजिश?
दिल्ली पुलिस के अनुसार, 12 सितंबर 2024 को एक CISF कर्मचारी ने एक बैग खोया-पाया कार्यालय में जमा कराया था। जब वह इसे टी-2 टर्मिनल के लॉस्ट एंड फाउंड रूम में लेकर गया, तो वहां मौजूद कर्मचारी प्रकाश चंद ने बैग के अंदर 2,500 डॉलर देखे।
प्रकाश ने तुरंत अपने साथी गौरव कुमार को इस बारे में बताया। गौरव ने उसे भरोसा दिलाया कि वे पैसे सुरक्षित निकाल सकते हैं और किसी को पता भी नहीं चलेगा। इस पर प्रकाश सहमत हो गया और दोनों ने चोरी की योजना बना ली।
कैसे की गई चोरी की एंट्री हेरफेर?
गौरव और प्रकाश ने सिस्टम से 2,500 डॉलर की एंट्री को हटा दिया, ताकि किसी को इस चोरी की भनक न लगे। दोनों ने 1,250-1,250 डॉलर आपस में बांट लिए और चुपचाप अपनी ड्यूटी जारी रखी। लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि CCTV कैमरे उनकी हर हरकत रिकॉर्ड कर रहे थे।
क्या होगा आरोपियों का अंजाम?
दिल्ली पुलिस ने दोनों कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इससे पहले भी इस तरह की कोई चोरी की गई थी।
आईजीआई एयरपोर्ट पर इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। यात्रियों का भरोसा जीतने के लिए एयरपोर्ट प्रशासन ने कहा है कि खोया-पाया विभाग की निगरानी और सख्त की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
क्या सीख सकते हैं यात्री?
इस घटना के बाद एयरपोर्ट पर यात्रा करने वाले यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि:
कीमती सामान और नकदी को बैग में रखने से बचें।
यदि कोई बैग खो जाता है, तो उसे वापस मिलने पर तुरंत चेक करें।
खोया-पाया विभाग में जमा सामान को लेने से पहले उसका रिकॉर्ड जांचें।
किसी भी गड़बड़ी की तुरंत CISF या पुलिस में शिकायत करें।
इस मामले की जांच अभी भी जारी है, और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कहीं यह एक संगठित चोरी का हिस्सा तो नहीं था। (यह खब
र अपडेट की जा रही है, अधिक जानकारी के लिए जुड़े रहें!)
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