रुद्रप्रयाग में आदमखोर गुलदार का खौफ खत्म? पिंजरे में कैद हुआ शिकारी, जांच के बाद होगा बड़ा खुलासा
देवल गांव में दहशत का अंत, वन विभाग की 32 सदस्यीय टीम ने ट्रैप कैमरों और ड्रोन से पकड़ा गुलदार
रुद्रप्रयाग – उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के जखोली ब्लॉक के देवल गांव में लोगों के लिए लंबे समय से दहशत का कारण बने गुलदार को आखिरकार वन विभाग ने पिंजरे में कैद कर लिया। गुलदार के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली, लेकिन अब इस बात की जांच होगी कि क्या यह गुलदार आदमखोर था या नहीं। वन्यजीव विशेषज्ञ इसका परीक्षण करेंगे और उनकी रिपोर्ट से स्थिति साफ होगी।
गुलदार का आतंक: बुजुर्ग महिला को उतारा था मौत के घाट
गुलदार के हमले की घटनाओं से यह पूरा इलाका सहमा हुआ था। 25 फरवरी की शाम, देवल गांव में 65 वर्षीय सत्येश्वरी देवी अपने खेत में घास काट रही थीं, तभी गुलदार ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें मौत के घाट उतार दिया। यह पहली घटना नहीं थी – इस इलाके में पहले भी पांच महिलाओं को गुलदार ने घायल कर दिया था, जिससे पूरे क्षेत्र में भय का माहौल था।
गुलदार को पकड़ने के लिए वन विभाग ने झोंकी पूरी ताकत
ग्रामीणों की शिकायत और गुलदार के बढ़ते आतंक को देखते हुए, रुद्रप्रयाग वन प्रभाग की 32 सदस्यीय टीम को इसे पकड़ने के लिए लगाया गया था। वन विभाग ने हाई-टेक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए 25 ट्रैप कैमरे, ड्रोन और चार पिंजरे लगाए, ताकि गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और उसे सुरक्षित रूप से पकड़ा जा सके। लगातार किए गए अथक प्रयासों के बाद गुलदार आखिरकार पिंजरे में कैद हो गया।
अब क्या होगा? विशेषज्ञ करेंगे जांच
गुलदार को पकड़े जाने के बाद वन्यजीव विशेषज्ञ इसकी पूरी जांच करेंगे। परीक्षण के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि क्या यह वही गुलदार है जिसने इंसानों पर हमला किया था, या फिर यह कोई और है। वन विभाग ने ग्रामीणों को भी सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना देने की अपील की है।
ग्रामीणों को राहत, लेकिन सतर्कता जरूरी
गुलदार के पकड़े जाने से ग्रामीणों को जरूर राहत मिली है, लेकिन वन विभाग ने चेतावनी दी है कि इलाके में अभी भी सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है। वन विभाग द्वारा जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, ताकि लोग सुरक्षित रहें और किसी भी संभावित खतरे से बचाव कर सकें।
क्या इस इलाके में और भी गुलदार सक्रिय हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर परीक्षण में यह गुलदार आदमखोर साबित नहीं होता है, तो इसका मतलब यह होगा कि क्षेत्र में अभी और भी गुलदार सक्रिय हैं। ऐसे में वन विभाग को इस मामले में आगे और भी निगरानी बढ़ानी होगी।
रुद्रप्रयाग के देवल गांव में गुलदार का पिंजरे में कैद होना एक बड़ी सफलता है, लेकिन यह अभी राहत की अंतिम मंजिल नहीं है। आदमखोर होने की पुष्टि के बाद ही यह तय हो सकेगा कि ग्रामीण अब पूरी तरह सुरक्षित हैं या नहीं। वन विभाग की टीम इस दिशा में पूरी मुस्तैदी से काम कर रही है, ताकि इलाके में फिर से सामान्य स्थिति बहाल की जा सके।
Share this content:
