May 1, 2026

बिहार: पिता ने चार बच्चों के साथ खाया जहर, तीन मासूमों की दर्दनाक मौत, गांव में मातम का माहौल

भोजपुर: बिहार के भोजपुर जिले में एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया है। बिहिया थाना क्षेत्र के बेलवानिया गांव में एक इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानदार ने अपने चार बच्चों के साथ जहर खा लिया। इस हादसे में तीन मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि पिता और एक बच्चा गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। यह हृदयविदारक घटना क्यों हुई, इसका कारण अब भी रहस्य बना हुआ है।

घटना का दर्दनाक विवरण

रात के अंधेरे में जब सब लोग सो रहे थे, तब इस परिवार ने यह खौफनाक कदम उठाया। पिता अरविंद, जो कि एक इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान चलाते थे, उन्होंने अपने चारों बच्चों को जहर खिलाया और फिर खुद भी जहर खा लिया। सुबह जब परिवार के अन्य लोगों को इस घटना की खबर लगी, तो घर में हाहाकार मच गया। सभी को तुरंत इलाज के लिए आरा सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने तीन बच्चों को मृत घोषित कर दिया।

घटना की सूचना मिलते ही बिहिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस ने परिवार के अन्य सदस्यों और स्थानीय लोगों से पूछताछ की, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर अरविंद ने इतना भयावह कदम क्यों उठाया।

गांव में शोक का माहौल, लोग सदमे में

बेलवानिया गांव में इस घटना के बाद मातम छा गया है। ग्रामीणों के मुताबिक, अरविंद काफी शांत स्वभाव का व्यक्ति था, लेकिन पिछले साल उसकी पत्नी की मौत हो गई थी। उसकी पत्नी की छत से गिरने से मौत हो गई थी, जिसके बाद से वह काफी गुमसुम रहने लगा था। लोगों को लगता है कि वह गहरे डिप्रेशन में था, लेकिन किसी ने सोचा भी नहीं था कि वह इतना बड़ा कदम उठा लेगा।

ग्रामीणों का कहना है कि अरविंद की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी, और शायद वह अपनी जिम्मेदारियों से परेशान होकर इस हद तक चला गया। उसकी पत्नी की मौत के बाद वह अकेले ही अपने चार बच्चों की देखभाल कर रहा था, जिससे वह मानसिक रूप से कमजोर हो गया था।

पुलिस की जांच जारी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि मामले की पूरी छानबीन की जा रही है और जल्द ही घटना के कारणों का खुलासा किया जाएगा। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल, पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या अरविंद ने यह कदम किसी आर्थिक तंगी की वजह से उठाया, या फिर वह गहरे अवसाद में था। इस बीच, गांव में हर कोई इस घटना से सदमे में है और सभी की आंखें नम हैं।

इस दुखद घटना ने एक बार फिर मानसिक स्वास्थ्य और अवसाद की गंभीरता को उजागर किया है। यदि समय रहते अरविंद को सही मार्गदर्शन और सहयोग मिला होता, तो शायद इतनी बड़ी त्रासदी को टाला जा सकता था।

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