April 21, 2026

प्रयागराज महाकुंभ में संगम के पानी की गुणवत्ता पर नया खुलासा: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट ने डाले सवाल

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को सौंपी गई एक नई रिपोर्ट ने प्रयागराज महाकुंभ के दौरान संगम में पानी की गुणवत्ता को लेकर नए दावे किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सांख्यिकीय विश्लेषण से यह सामने आया है कि संगम का पानी “स्नान के लिए उपयुक्त” था, जो कि फरवरी में पेश की गई पिछली रिपोर्ट के विपरीत है, जिसमें पानी की गुणवत्ता को मानकों के अनुरूप नहीं बताया गया था।

पानी की गुणवत्ता पर पहले आई थी नकारात्मक रिपोर्ट

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने 17 फरवरी को एनजीटी को जो रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, उसमें दावा किया गया था कि महाकुंभ के दौरान संगम के पानी में फेकल कोलीफॉर्म और बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) का स्तर स्नान के मानकों को पूरा नहीं कर रहा था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि पानी में फेकल कोलीफॉर्म का स्तर 2,500 यूनिट प्रति 100 मिलीलीटर से ऊपर था, जो एक महत्वपूर्ण सीवेज संदूषण को दर्शाता था।

नई रिपोर्ट में आए उलटे दावे

लेकिन 28 फरवरी को सीपीसीबी ने एक नई रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें दावा किया गया कि महाकुंभ के दौरान संगम के पानी की गुणवत्ता स्नान के लिए उपयुक्त थी। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 12 जनवरी से 22 फरवरी के बीच, 10 स्थानों से नमूने एकत्रित किए गए थे और कुल 20 दौर की निगरानी की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, सांख्यिकीय विश्लेषण में पाया गया कि पानी की गुणवत्ता मापदंडों के औसत मान निर्धारित सीमा के भीतर थे, जो पहले की रिपोर्ट के विपरीत थे।

सांख्यिकीय विश्लेषण का महत्व

रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि सांख्यिकीय विश्लेषण की आवश्यकता इसलिए पड़ी, क्योंकि अलग-अलग तिथियों पर एक ही स्थान से और एक ही दिन अलग-अलग स्थानों से एकत्र किए गए नमूनों में “डेटा की परिवर्तनशीलता” थी। इसका मतलब यह था कि पानी के नमूनों में अलग-अलग स्थानों और समय पर भिन्न-भिन्न परिणाम मिल रहे थे, जिससे पूरे क्षेत्र की जल गुणवत्ता का सही आकलन करना मुश्किल हो रहा था।

रिपोर्ट में बताया गया कि “विभिन्न तिथियों पर एक ही स्थान से लिए गए नमूनों के लिए मापदंड मूल्य अलग-अलग थे। एक ही दिन एकत्र किए गए नमूनों के लिए भी इन मापदंडों के मूल्य अलग-अलग स्थानों पर भिन्न थे।” इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अपस्ट्रीम मानवजनित गतिविधियों, नदी की धारा, नमूने की गहराई, नमूने का समय और स्थान जैसे विभिन्न कारकों के कारण जल की गुणवत्ता में बदलाव हो सकता है।

सीपीसीबी की रिपोर्ट के निष्कर्ष

नई रिपोर्ट में सीपीसीबी ने यह दावा किया कि डेटा की केंद्रीय प्रवृत्ति के आधार पर, जो कि औसत मान था, पानी के गुणवत्ता मापदंड सीमा के भीतर थे। रिपोर्ट के अनुसार:

  • फेकल कोलीफॉर्म (एफसी) का औसत मूल्य 1,400 था, जबकि अनुमेय सीमा 2,500 यूनिट प्रति 100 मिलीलीटर थी।
  • घुलित ऑक्सीजन (डीओ) का स्तर 8.7 मिलीग्राम प्रति लीटर था, जबकि निर्धारित मानक 5 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक था।
  • बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) का स्तर 2.56 मिलीग्राम प्रति लीटर था, जो कि निर्धारित सीमा 3 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम था।

इन आंकड़ों के आधार पर सीपीसीबी ने यह निष्कर्ष निकाला कि संगम का पानी “स्नान के लिए उपयुक्त” था, जो पहले की रिपोर्ट से उलट था।

अब क्या होगा?

हालांकि, यह रिपोर्ट एक बड़ी पलटी दर्शाती है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि पानी की गुणवत्ता में बदलाव के कारणों पर और गहराई से शोध किया जाना चाहिए। यह भी महत्वपूर्ण है कि इस विश्लेषण के बाद भी, सीपीसीबी और एनजीटी दोनों को इस मुद्दे पर पूरी तरह से संतुष्ट होने से पहले विस्तृत निगरानी और रिपोर्टिंग की आवश्यकता हो सकती है।

इस रिपोर्ट ने महाकुंभ में संगम के पानी की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों को फिर से तूल दे दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि एनजीटी इस नए विश्लेषण को कैसे स्वीकार करता है और क्या महाकुंभ के दौरान पानी की गुणवत्ता पर और भी निगरानी की जाएगी।

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