April 23, 2026

संभल के सीओ के बयान पर बवाल, प्रशासन ने मीडिया ब्रीफिंग पर लगाई रोक

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में हाल ही में सीओ अनुज चौधरी के एक बयान ने विवाद खड़ा कर दिया, जिसके बाद प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए मीडिया से अधिकारियों की बातचीत पर रोक लगा दी है। सीओ के बयान के बाद, जहां एक तरफ उनकी टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक और सामाजिक संगठनों द्वारा उनके खिलाफ विरोध भी शुरू हो गया।

सीओ का विवादास्पद बयान

संभल के सीओ अनुज चौधरी का बयान हाल ही में एक तकरार का कारण बना। बयान में उन्होंने कहा था कि होली और जुमे का एक ही दिन पड़ना एक संवेदनशील मुद्दा हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर मुस्लिम समुदाय के लोग यह मानते हैं कि होली के रंग से उनका धर्म भ्रष्ट हो जाएगा तो उन्हें उस दिन घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। इसके साथ ही, सीओ ने यह भी चेतावनी दी थी कि अगर होली के दिन कोई उपद्रवी हरकत करता हुआ पाया जाता है, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि संभल में शांति-व्यवस्था को किसी भी हालत में बिगड़ने नहीं दिया जाएगा।

यह बयान सोशल मीडिया पर फैलते ही विवाद का कारण बन गया। कई लोग इस बयान को धार्मिक भावना को भड़काने वाला मानते हुए इसके विरोध में उतर आए। वहीं, राजनीतिक दलों ने भी इस बयान पर सवाल उठाए और इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं दीं।

प्रशासन की कार्रवाई

सीओ के बयान के बाद संभल प्रशासन ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए मीडिया ब्रीफिंग पर रोक लगा दी। संभल के डीएम राजेंद्र पसिया ने आदेश दिया कि अब कोई भी अधिकारी बिना अनुमति के मीडिया को बयान नहीं देगा। उनके अनुसार, जनपद में मीडिया से संवाद करने के लिए डीएम और एसपी की अनुमति जरूरी होगी। कलेक्टर के इस आदेश के बाद अब संभल में कोई भी अधिकारी मीडिया से संवाद नहीं कर पाएगा।

विपक्ष का कड़ा विरोध

सीओ अनुज चौधरी के बयान पर विपक्ष ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बयान की निंदा करते हुए कहा कि यदि अधिकारी इस प्रकार की नकारात्मक बातें करेंगे तो समाज में सौहार्द कैसे बना रहेगा। सपा नेता ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह बयान न सिर्फ धार्मिक असमंजस पैदा करता है, बल्कि यह सरकार की नाकामी को भी दर्शाता है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि बीजेपी और संभल प्रशासन सांप्रदायिक माहौल खराब करने में जुटे हुए हैं।

प्रशासन का त्वरित कदम

संभल प्रशासन ने सीओ के बयान के बाद त्वरित कदम उठाते हुए मीडिया पर अधिकारियों की ब्रीफिंग को बंद कर दिया। इससे साफ जाहिर होता है कि प्रशासन किसी भी प्रकार के विवाद से बचने के लिए तत्पर है। हालांकि, विपक्षी दलों द्वारा इस कदम पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि प्रशासन ने सीओ के बयान से जुड़ी जांच को दबाने की कोशिश की है।

संभल में हुई इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन और मीडिया के रिश्ते पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना होगा कि इस मामले में प्रशासन और विपक्ष के बीच किस तरह की स्थिति उत्पन्न होती है।

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