सेंट्रल जीएसटी के छापों में बड़ा खुलासा, 2.30 लाख करोड़ रुपये की टैक्स चोरी, फिर भी सरकारी खजाने में सिर्फ 31 हजार करोड़ की वापसी
वर्ष 2019-20 में 10,000 से ज्यादा छापों के दौरान 40,000 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का पर्दाफाश हुआ था, और इस साल भी 18,000 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी की रिकवरी में सफलता मिली थी। लेकिन, एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है जिसमें बताया गया कि इन छापों के बावजूद सरकारी खजाने में महज 31,000 करोड़ रुपये की ही वापसी हुई, जबकि टैक्स चोरी का आंकड़ा 2.30 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
सेंट्रल जीएसटी विभाग ने पिछले कुछ वर्षों में टैक्स चोरी पर अंकुश लगाने के लिए लगातार छापेमारी की है। इन छापों के बाद, विभाग ने कई कारोबारी और फर्जी कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। लेकिन सरकारी खजाने में आने वाली रकम ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है—क्या यह कार्रवाई पर्याप्त है?
वर्ष 2020-21 में 12,500 से ज्यादा छापे मारे गए, जिसमें 50,000 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी पकड़ी गई, लेकिन सरकारी खजाने में सिर्फ 12,000 करोड़ रुपये ही वापस आ सके। 2021-22 में 12,500 छापे मारे गए और टैक्स चोरी का खुलासा 73,000 करोड़ रुपये से अधिक हुआ, जिसमें से केवल 25,000 करोड़ रुपये ही सरकारी खजाने में आए।
वर्ष 2022-23 में छापों की संख्या बढ़कर 15,500 हो गई और टैक्स चोरी का आंकड़ा 1.31 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, फिर भी सरकार को सिर्फ 33,000 करोड़ रुपये की रिकवरी हुई। इसके बाद, वर्ष 2023-24 में 20,000 से ज्यादा छापे मारे गए, और टैक्स चोरी का आंकड़ा 2.30 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ गया, लेकिन सरकारी खजाने में केवल 31,000 करोड़ रुपये की ही रिकवरी हो पाई।
गिरफ्तारी की संख्या भी हैरान करने वाली रही है। वर्ष 2020-21 में 231 लोग गिरफ्तार किए गए थे, जबकि वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 223 हो गया। छापों के बाद गिरफ्तारियों का सिलसिला भी जारी रहा, लेकिन टैक्स चोरी के बढ़ते आंकड़े और कम रिकवरी ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है—क्या इस प्रकार की छापेमारी सरकार के लिए वास्तव में फायदेमंद साबित हो रही है?
इन आंकड़ों पर नजर डालते हुए, विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। क्या छापेमारी के दौरान अधिक प्रभावी उपायों की जरूरत नहीं है? क्या ज्यादा छापे और गिरफ्तारियां ही समाधान हैं, या इसके अलावा कुछ और कदम उठाने की आवश्यकता है?
इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में जीएसटी छापों को लेकर कारोबारियों को बड़ी राहत दी थी, और यह भी स्पष्ट किया था कि फर्जी फर्मों और जीएसटी छापों का ब्योरा पेश करने का आदेश दिया गया था। यह निर्णय उन व्यवसायों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है जो लगातार इस प्रकार की छापेमारी से प्रभावित होते हैं।
इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जीएसटी चोरी को रोकने के लिए और सख्त उपायों की आवश्यकता हो सकती है, ताकि टैक्स चोरी को प्रभावी रूप से रोका जा सके और सरकार को ज्यादा से ज्यादा राजस्व प्राप्त हो सके।
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