April 21, 2026

इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा आदेश: विशेष न्यायाधीश अली रजा को 12 साल बाद पत्नी को गुजारा भत्ता देने के निर्देश, अदालत ने किया कड़ा बयान

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए विशेष न्यायाधीश अली रजा के वेतन खाते से प्रत्येक माह 20 हजार रुपये की राशि उनकी पत्नी शबाना बानो को गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है। यह फैसला 12 वर्षों के लंबे कानूनी संघर्ष के बाद आया है, जब अली रजा ने 2013 में अपनी पत्नी को घर से निकाल दिया था और उसके बाद पत्नी को गुजारा भत्ता देने से लगातार इंकार किया।

12 वर्षों तक कानूनी दावों में उलझाए रखा: कोर्ट ने किया कड़ा ऐतराज

शबाना बानो की याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज विनोद दिवाकर ने कहा कि एक न्यायिक अधिकारी होने के बावजूद अली रजा ने अपनी पत्नी के अधिकारों का उल्लंघन किया और 12 साल तक उसे कानूनी प्रक्रिया में उलझाए रखा। अदालत ने यह भी कहा कि फैमिली कोर्ट द्वारा गुजारा भत्ता देने का आदेश दिए जाने के बावजूद, पति ने जानबूझकर एलिमनी राशि का भुगतान नहीं किया, और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग किया।

न्याय में देरी पर सख्त टिप्पणी

कोर्ट ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि विशेष न्यायाधीश ने पत्नी को गुजारा भत्ता देने की बजाय उसे सालों तक न्याय के लिए इंतजार करवाया। अदालत ने यह भी कहा कि पत्नी को उसके हक का भुगतान तुरंत किया जाना चाहिए और वह याचिका दाखिल करने की तारीख से ही गुजारा भत्ता पाने की हकदार है।

कोर्ट ने तय की समयसीमा, छह महीने में भुगतान की बात

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अली रजा को आदेश दिया है कि वह छह महीने के भीतर शबाना बानो को पूरा बकाया गुजारा भत्ता और वाद खर्च 50 हजार रुपये सहित भुगतान करें। अदालत ने यह भी कहा कि तीन सप्ताह के भीतर शबाना बानो को 50 हजार रुपये वाद खर्च सहित देने की व्यवस्था की जाए।

कई वर्षों तक कानूनी संघर्ष, 35 बार सुनवाई टली

यह मामला 2013 में शबाना बानो द्वारा पति के खिलाफ दाखिल की गई याचिका से शुरू हुआ था। पति ने न केवल कानूनी लड़ाई को लंबा खींचा, बल्कि मिडियेशन में भी 35 बार सुनवाई टलाई थी। इसके बाद भी अली रजा ने गुजारा भत्ता की याचिका पर लगभग 47 बार तारीख टलवाई। इसके बाद कोर्ट ने इस मामले में जल्द फैसला देने का आदेश दिया।

इस फैसले से यह साफ हो गया कि न्यायिक अधिकारी के रूप में अली रजा ने अपने कर्तव्यों का उल्लंघन किया और कोर्ट ने इस पर सख्त कार्रवाई करते हुए पत्नी के अधिकारों को सुनिश्चित किया।

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!