तेलंगाना के नागरकुरनूल में एसएलबीसी सुरंग में फंसे आठ लोगों को बचाने की कोशिशों में सफलता की उम्मीद कम, भविष्य अनिश्चित
तेलंगाना के नागरकुरनूल जिले में एसएलबीसी सुरंग में फंसे आठ लोगों को बचाने के लिए एक सप्ताह से चल रहा बचाव अभियान अब अपने अंतिम चरण में है, लेकिन उनकी किस्मत पर संदेह के बादल मंडरा रहे हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) सहित कई एजेंसियों की टीमों की लगातार कोशिशों के बावजूद, स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। इस अभियान में थोड़ी सफलता जरूर मिली है, लेकिन आठ में से चार लोगों का ही पता चल पाया है। हालांकि, अधिकारियों ने इन चार लोगों के जीवित होने की संभावना को लेकर गंभीर आशंका व्यक्त की है।
तेलंगाना के सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने इस अभियान की समीक्षा करते हुए कहा कि उन सभी के जीवित बचने की संभावना बेहद कम है, सिर्फ एक प्रतिशत। उनका यह बयान स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है, क्योंकि उनके परिवार के लोग अब भी किसी चमत्कार की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
यह घटना 22 फरवरी की है, जब श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल (एसएलबीसी) सुरंग की छत अचानक ढह गई, और इसके नीचे आठ लोग दब गए। इनमें इंजीनियर और श्रमिक शामिल हैं। तब से ही बचाव दल दिन-रात अपनी जान जोखिम में डालकर इन लोगों को निकालने में जुटे हुए हैं। राज्य के आबकारी मंत्री जुपल्ली कृष्णा राव ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में टीमों ने कुछ प्रगति की है, लेकिन जीवित बचने की संभावना कम है।
“हमने ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) का इस्तेमाल किया, जिससे सुरंग के अंदर कुछ विसंगतियों का पता चला। हालांकि, मलबा निकालने का काम मैन्युअली किया जा रहा है, और यह बहुत ही धीमी प्रक्रिया है,” कृष्णा राव ने कहा। उन्होंने यह भी बताया कि बावजूद इसके, बचाव अभियान जारी रहेगा और रविवार शाम तक कुछ ठोस जानकारी मिल सकती है।
सुरंग में फंसे लोगों के परिवारवालों का दिल उनके जीवित होने की उम्मीद में धड़क रहा है, लेकिन समय की बढ़ती नजदीकी और हालात की गंभीरता को देखते हुए, अब सबकी सांसें थमी हुई हैं। क्या यह आठ लोग अपनी जान बचाने में सफल हो पाएंगे, या समय के साथ उनकी उम्मीदें चकनाचूर हो जाएंगी, यह सवाल अब भी अनुत्तरित है। बचाव अभियान और सस्पेंस के बीच सभी की नजरें रविवार की शाम पर टिकी हुई हैं।
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