चित्तौड़गढ़ में भूमि पट्टों का फर्जीवाड़ा: सहकारी मंत्री के निर्वाचन क्षेत्र में सैकड़ों भूमि पट्टे फर्जी तरीके से जारी करने का मामला, विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता ने की कार्रवाई की मांग
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जिसमें सहकारी मंत्री गौतम दक के निर्वाचन क्षेत्र में स्थित नगर पालिका की संलिप्तता सामने आई है। एक ओर जहां नगर पालिका अधिकारी इस मामले में कार्रवाई की बात कर रहे हैं, वहीं पुलिस और प्रशासन ने इस पर ठोस कदम उठाने के बजाय सिर्फ परिवाद केस दर्ज कर मामले को टालने का प्रयास किया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यह सिर्फ एक उदाहरण है, बल्कि इस तरह के सैकड़ों फर्जी भूमि पट्टे जारी किए गए हैं, जिन्हें अब जांच के दायरे में लाया जा रहा है।
फर्जी हस्ताक्षर से हुआ भूमि का हस्तांतरण
यह मामला नगर पालिका बड़ी सादड़ी क्षेत्र का है, जहां गोविंद राम भोई के नाम पर एक भूमि का पट्टा जारी किया गया था। यह पट्टा एक फर्जी हस्तांतरण पत्र के आधार पर जारी हुआ, जिस पर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी मुकेश मोहिल के हस्ताक्षर थे। जब सोशल मीडिया पर इन दस्तावेजों के फर्जी होने की जानकारी वायरल हुई, तो नगर पालिका ने मामले की जांच शुरू की। जांच में यह तथ्य सामने आया कि यह दस्तावेज असली नहीं थे, और इन पर किए गए हस्ताक्षर भी गलत थे। इसके बाद यह मामला तहसील कार्यालय तक पहुंचा, जहां रजिस्ट्री भी हो चुकी थी।
अधिशासी अधिकारी का बयान और जांच कमेटी की गठन
अधिशासी अधिकारी मुकेश मोहिल ने इस मामले को लेकर थाना में शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना है कि इस तरह के और भी फर्जी दस्तावेज हो सकते हैं, जिन्हें जांच के दायरे में लाया जा सकता है। इसके लिए नगर पालिका बड़ी सादड़ी ने एक कमेटी गठित कर दी है, जो सारे रिकॉर्ड की जांच करेगी। मुकेश मोहिल के अनुसार, हस्तांतरण प्रमाण पत्र, पट्टा निर्माण और भू उपयोग परिवर्तन जैसे कार्य स्थानीय निकाय की आय का प्रमुख स्रोत होते हैं, और इनसे जमा की जाने वाली राशि का उपयोग विकास कार्यों में किया जाता है। लेकिन यहां पर खुद अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर विकास कार्यों से जुड़े धन का गड़बड़ी से उपयोग किया जा रहा था।
पुलिस और प्रशासन पर सवाल उठाए जा रहे हैं
इस मामले में पुलिस उपाधीक्षक देशराज कुलदीप का कहना है कि शिकायत प्राप्त हुई है और जांच जारी है। हालांकि, अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है और केवल परिवाद केस दर्ज किया गया है। इसके बारे में शिकायत करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता विनोद रांका ने आरोप लगाया है कि यह केवल एक दस्तावेज का मामला नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे सैकड़ों दस्तावेज हो सकते हैं, जिन्हें गलत तरीके से जारी किया गया है। रांका ने तीन दिन के भीतर जांच और कार्रवाई की मांग की है, नहीं तो वे धरना प्रदर्शन करेंगे।
विपक्ष ने भी उठाया मुद्दा
यह मामला प्रदेश के सहकारिता मंत्री गौतम दक के निर्वाचन क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, और जैसे ही यह मामला सामने आया, विपक्ष ने हमला बोल दिया। कांग्रेस के पार्षद और पूर्व पालिका अध्यक्ष दिलीप चौधरी ने इस मामले में जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि मंत्री के गृह क्षेत्र में इस तरह की गड़बड़ी हो रही है, यह गंभीर चिंता का विषय है। चौधरी ने यह भी कहा कि इस मामले में उचित कानूनी कार्रवाई की जाए और प्राथमिकी दर्ज की जाए, ताकि आरोपी जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकें।
क्या अब प्रशासन और पुलिस कार्रवाई करेंगे?
यह मामला अब प्रशासन के लिए एक चुनौती बन चुका है, क्योंकि इसके जरिए एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जिससे न सिर्फ सरकारी खजाने को नुकसान हुआ है, बल्कि नागरिकों को भी धोखा दिया गया है। पुलिस और प्रशासन के पास अब यह सवाल है कि क्या वे इस मामले में गंभीरता से कार्रवाई करेंगे और फर्जी दस्तावेजों के सृजन और वितरण में शामिल लोगों को जिम्मेदार ठहराएंगे?
इस समय, स्थानीय लोग और विपक्षी पार्टियां दोनों इस मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस तरह के फर्जीवाड़े को समय रहते रोका जा सके और दोषियों को सजा मिल सके।
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