April 21, 2026

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन के बाद अमित शाह की पहली बैठक: क्या होंगे आगामी कदम, क्या है हिंसा का भविष्य?

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को राज्य की सुरक्षा स्थिति पर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक बुलाई है। यह बैठक सुबह 11 बजे नई दिल्ली के नॉर्थ ब्लॉक स्थित गृहमंत्रालय में होगी, जिसमें गृहमंत्री अमित शाह मणिपुर के हालात पर चर्चा करेंगे। इस बैठक में मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, राज्य सरकार के अधिकारी, सेना और अर्धसैनिक बलों के शीर्ष अधिकारी भी शामिल होंगे।

राष्ट्रपति शासन के बाद पहली समीक्षा बैठक

मणिपुर में मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था। मुख्यमंत्री का इस्तीफा पार्टी के कुछ विधायकों के विद्रोह के कारण आया था, और इसके बाद राज्य में पिछले दो सालों से जारी जातीय हिंसा ने स्थिति को और बिगाड़ दिया था। मणिपुर में अब तक 1951 के बाद से 11 बार राष्ट्रपति शासन लगाया जा चुका है। अब, राष्ट्रपति शासन के बाद पहली बार गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में इस संकट की समीक्षा की जाएगी, जिसमें आगे की रणनीति पर निर्णय लिया जाएगा।

कौन-कौन होगा बैठक में शामिल?

सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, सुरक्षा सलाहकार कुलदीप सिंह, डीजीपी राजीव सिंह और मुख्य सचिव पीके सिंह शामिल होंगे। यह बैठक राष्ट्रपति शासन के तहत गृहमंत्री के साथ शीर्ष अधिकारियों की पहली बैठक है, और इस बैठक से राज्य के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण निर्णयों की उम्मीद की जा रही है। बैठक के नतीजे पर सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह बैठक मणिपुर की वर्तमान स्थिति और सुरक्षा उपायों के बारे में महत्वपूर्ण फैसलों का मार्ग प्रशस्त करेगी।

हथियारों की लूट और सरेंडर की प्रक्रिया:

मणिपुर में हिंसा के दौरान दोनों जातियों के बीच उग्र संघर्ष के कारण लगभग 6500 बंदूकें और 600,000 गोला-बारूद लूट लिए गए थे। इस बैठक की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है, क्योंकि यह समय उस बिंदु पर आया है जब सेना और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां इन लूटे गए हथियारों को वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं। केंद्रीय एजेंसियां कुकी और मैतेई दोनों समुदायों के साथ मिलकर हथियारों के सरेंडर की प्रक्रिया को तेज करने की कोशिश कर रही हैं।

राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने एक माफी योजना शुरू की थी, जिसके तहत लोगों को सात दिनों के भीतर हथियार वापस करने का अवसर दिया गया। अब तक इस योजना के तहत 650 हथियार और गोला-बारूद को सरेंडर किया गया है। हालांकि, पुलिस शस्त्रागारों से लूटे गए कुल 6500 हथियारों में से सेना केवल 2500 हथियार ही बरामद कर पाई है। इस स्थिति को देखते हुए राज्यपाल भल्ला ने हथियारों को वापस करने की समय सीमा को बढ़ाकर 6 मार्च तक कर दी है और लोगों को आश्वासन दिया है कि इस समय सीमा के भीतर हथियार वापस करने पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

जातीय संघर्ष का संदर्भ और मणिपुर का वर्तमान संकट:

मणिपुर में जातीय संघर्ष 3 मई, 2024 से शुरू हुआ था और आज भी सामान्य स्थिति बहाल नहीं हो पाई है। लगभग 22 महीने बाद भी मणिपुर में हिंसा और असुरक्षा की स्थिति कायम है। इस हिंसा ने राज्य के समाज और राजनीति को बुरी तरह प्रभावित किया है। 13 फरवरी 2024 को राष्ट्रपति शासन लागू करने के बाद, मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह का इस्तीफा स्थिति को और जटिल बना गया। एन बीरेन सिंह के इस्तीफे से कुछ दिन पहले, केंद्र सरकार ने पूर्व गृह सचिव अजय कुमार भल्ला को मणिपुर का राज्यपाल नियुक्त किया था, और उनके द्वारा कई अहम निर्णय लिए गए हैं।

आखिरकार, क्या मणिपुर के लोग उम्मीद कर सकते हैं?

आज की बैठक मणिपुर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके परिणाम राज्य के भविष्य के लिए निर्णायक हो सकते हैं। जहां एक ओर सरकार हथियारों की वापसी और हिंसा को समाप्त करने की दिशा में कदम उठा रही है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक संकट और जातीय हिंसा के कारण स्थिति अब भी अस्थिर बनी हुई है। गृहमंत्री अमित शाह की समीक्षा बैठक से यह साफ हो सकता है कि मणिपुर के लिए आगे की राह क्या होगी—क्या राज्य में स्थिति जल्द सामान्य होगी या फिर यह संकट और गहरा जाएगा?

समाप्ति की ओर बढ़ते इस गंभीर संकट के बीच, मणिपुर के लोग इस बैठक और इसके नतीजों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

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