रूस-यूक्रेन युद्ध में यूक्रेन की खुफिया चाल: रूसी सैनिकों के ड्रोन चश्मे में ब्लास्ट, 12 सैनिक घायल
रूस-यूक्रेन युद्ध में जहां एक तरफ पुतिन की सेना अपनी पूरी ताकत झोंक रही है, वहीं यूक्रेन ने अब एक नई खुफिया रणनीति के तहत रूस की सेना को करारा झटका दिया है। यूक्रेनी सेना ने एक चौंकाने वाले खुलासे के बाद रूस के सैनिकों के ड्रोन चश्मे में ब्लास्ट करवाया, जिससे 12 से ज्यादा रूसी सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना यूक्रेन की खुफिया कार्रवाई का एक हिस्सा बताई जा रही है, जिसने रूस को एक बड़ा झटका दिया है।
रूसी सैनिकों के ड्रोन चश्मे में ब्लास्ट
द कीव इंडिपेंडेंट के मुताबिक, रूस के सैनिकों द्वारा ड्रोन ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ‘फर्स्ट-पर्सन-व्यू’ (FPV) चश्मे में ब्लास्ट हुआ। ये चश्मे सैनिकों को ड्रोन की लाइव फीड को सीधे उनके चश्मे पर देखने की सुविधा प्रदान करते हैं। हाल ही में जब रूसी सैनिकों ने यह चश्मा पहना हुआ था, तो अचानक ब्लास्ट हो गया, जिससे एक दर्जन से ज्यादा सैनिकों की आंखों में गंभीर चोटें आईं। इस घटना के बाद रूस के सैन्य अधिकारियों ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन यह पूरी घटना यूक्रेनी खुफिया विभाग की कार्रवाई की तरफ इशारा कर रही है।
यूक्रेनी खुफिया कार्रवाई का खुलासा
अंग्रेजी अखबार “द सन” के मुताबिक, यूक्रेन ने खुफिया कार्रवाई के तहत रूस को ड्रोन ऑपरेशंस के लिए इस्तेमाल होने वाले चश्मे भेजे थे। इन चश्मों में एक खास किस्म का व्हाइट कलर का केमिकल और एक चिप डाली गई थी, जिसके जरिए यूक्रेनी सेना रूस के सैनिकों को ट्रैक कर सकती थी। यह चिप और केमिकल रूस के सैनिकों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इस्तेमाल किए गए थे। यूक्रेन ने इस खुफिया ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए एक एनजीओ की मदद ली थी, जिसके माध्यम से उसने रूस को 80 चश्मे भेजे थे।
ब्लास्ट के पीछे की साजिश: क्या था इसका उद्देश्य?
4 फरवरी को यूक्रेन ने पहली बार इन चश्मों को ब्लास्ट करवाया, और उसके बाद से अब तक लगभग 12 चश्मे इसी तरह के ब्लास्ट का शिकार हो चुके हैं। कहा जा रहा है कि यूक्रेन ने इन चश्मों में व्हाइट केमिकल भरा था, जिसे कोडिंग के जरिए एक पेजर से जोड़ा गया था। जब यूक्रेनी सेना को यह महसूस हुआ कि रूसी सैनिकों की गतिविधियों पर पूरी तरह से नियंत्रण नहीं रखा जा सकता, तो उन्होंने इन चश्मों को ब्लास्ट करने का फैसला लिया।
रूसी सैनिकों की मनोवैज्ञानिक दबाव में स्थिति
जानकारों का कहना है कि यूक्रेन का यह कदम रूसी सैनिकों को मानसिक रूप से तोड़ने की एक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। यह खुफिया ऑपरेशन न केवल शारीरिक नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से था, बल्कि इसका लक्ष्य रूस के सैनिकों पर मनोवैज्ञानिक दबाव डालना भी था, ताकि उनका मनोबल टूट सके और वे युद्ध की मानसिक चुनौतियों से जूझने में कमजोर पड़ सकें। अब तक रूस-यूक्रेन युद्ध में 8 लाख से ज्यादा रूसी सैनिक मारे जा चुके हैं, और इस तरह की घटनाएं उनकी मानसिक स्थिति को और भी कमजोर कर सकती हैं।
यूक्रेन और रूस के बीच खुफिया जंग
रूस ने यूक्रेन के इस खुफिया ऑपरेशन को साजिश करार दिया है, जबकि यूक्रेनी रक्षा अधिकारी इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। यूक्रेनी सेना ने यह कदम उठाकर यह साफ कर दिया है कि वह केवल युद्ध के मैदान में ही नहीं, बल्कि खुफिया रणनीतियों और मानसिक युद्ध में भी रूस के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने में सक्षम है। यह पूरी घटना रूस-यूक्रेन युद्ध के एक नए और खतरनाक मोड़ की ओर इशारा करती है, जहां दोनों देशों के बीच केवल सैन्य शक्ति की नहीं, बल्कि खुफिया लड़ाई की भी भूमिका अहम हो रही है।
क्या और घटनाएं होंगी सामने?
यह मामला अभी भी जांच के दायरे में है, और रूस के सैन्य अधिकारी इस घटना को लेकर गंभीरता से जांच कर रहे हैं। यूक्रेन की खुफिया कार्रवाइयां अब तक युद्ध के अन्य पहलुओं में भी रूस को भारी नुकसान पहुंचा चुकी हैं, और आने वाले दिनों में इस तरह की और घटनाओं की आशंका जताई जा रही है। युद्ध के इस नए मोर्चे पर दोनों देशों की साजिशें और रणनीतियां भविष्य में और भी चौंकाने वाले खुलासे कर सकती हैं।
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