April 22, 2026

तीन महीने से वेतन न मिलने पर शिक्षक हुआ मजबूर, मजदूरी करने के लिए स्कूल से ली छुट्टी

ओडिशा: ओडिशा के बलांगीर जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक सरकारी स्कूल के शिक्षक को पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है। इस स्थिति में, शिक्षक प्रभुदत्ता साहू को अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए अब मजदूरी करने को मजबूर होना पड़ा है। उनका पूरा परिवार उनकी तनख्वाह पर निर्भर था, और वेतन न मिलने की वजह से परिवार की आर्थिक हालत काफी बिगड़ गई है।

वेतन न मिलने से बढ़ा संकट

यह मामला बलांगीर जिले के पुइनताला ब्लॉक स्थित बंधनबहाल सरकारी प्राथमिक विद्यालय का है, जहां सहायक शिक्षक प्रभुदत्ता साहू कार्यरत हैं। वे पिछले तीन महीनों से बिना वेतन के काम कर रहे थे, जिसके कारण उनका परिवार मुश्किल में पड़ गया है। प्रभुदत्ता साहू का परिवार पूरी तरह से उनकी तनख्वाह पर निर्भर था, लेकिन वेतन न मिलने के कारण घर चलाना मुश्किल हो गया। इसके परिणामस्वरूप, उन्होंने अपनी जीविका चलाने के लिए मजदूरी करने का निर्णय लिया।

मजदूरी करने के लिए स्कूल से छुट्टी का आवेदन

अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रभुदत्ता साहू ने स्कूल के प्रिंसिपल से छुट्टी का आवेदन किया। आवेदन में उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा कि वे जब तक वेतन प्राप्त नहीं करते, तब तक वे सप्ताह में कुछ दिन स्कूल में पढ़ाएंगे और बाकी के दिन मजदूरी करेंगे। यह आवेदन प्रिंसिपल ने स्वीकार कर लिया, लेकिन इस घटना ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिक्षकों के वेतन में देरी पर सवाल उठते हैं

इस मामले ने प्रशासन और शिक्षा विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल उठता है कि क्यों तीन महीनों तक शिक्षक को वेतन नहीं दिया गया? क्या यह स्थिति सरकार और प्रशासन की नीरसता को दर्शाती है? क्या वेतन समय पर न मिलने से शिक्षकों की मानसिक स्थिति और शिक्षा की गुणवत्ता पर असर नहीं पड़ता है?

यह मामला राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के लिए गंभीर चेतावनी बनकर उभरा है, क्योंकि यह सिर्फ शिक्षक की वित्तीय स्थिति ही नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों के सम्मान को भी प्रभावित करता है। सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षक यदि समय पर वेतन नहीं पा सकते, तो उनकी प्रेरणा और कार्यक्षमता पर असर पड़ता है, जो ultimately बच्चों की शिक्षा को प्रभावित करता है।

क्या सरकार इस मुद्दे पर कोई कदम उठाएगी?

प्रभुदत्ता साहू की इस स्थिति ने न केवल शिक्षा विभाग की खामियों को उजागर किया है, बल्कि यह सवाल भी उठाया है कि क्या सरकार शिक्षकों की स्थिति और उनके अधिकारों को लेकर गंभीर है। क्या जल्द ही इस मामले पर सरकार और शिक्षा विभाग कोई ठोस कदम उठाएंगे, या यह मामला बस ऐसे ही दब जाएगा?

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