April 17, 2026

27 साल बाद दिल्ली में बीजेपी की ऐतिहासिक वापसी: कपिल मिश्रा की ताकतवर राजनीतिक यात्रा और उनके विवादित बयान

दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी ने 27 साल बाद सत्ता में वापसी की है, और इस ऐतिहासिक पल का नेतृत्व रेखा गुप्ता के हाथों में सौंपा गया है। इसके अलावा, पार्टी ने अपने मंत्रिमंडल में छह नए चेहरों को शामिल किया है, जिनमें से दो नाम खासतौर पर चर्चा में हैं। कपिल मिश्रा और मनजिंदर सिंह सिरसा वह दो नेता हैं जिन्होंने अन्य पार्टियों को छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था। कपिल मिश्रा का नाम दिल्ली की राजनीति में हमेशा विवादों और उनके तीखे बयानों के कारण सुर्खियों में रहा है।

कपिल मिश्रा: आम आदमी पार्टी से बीजेपी तक का सफर

कपिल मिश्रा ने आम आदमी पार्टी (AAP) से अपनी राजनीति की शुरुआत की थी और एक समय पर उन्हें अरविंद केजरीवाल का करीबी माना जाता था। लेकिन यह करीबी ज्यादा समय तक नहीं टिक पाया। 2017 में कपिल मिश्रा ने केजरीवाल और उनकी पार्टी के खिलाफ जबरदस्त आरोप लगाए, जिससे राजनीति में भूचाल आ गया। उन्होंने केजरीवाल पर 2 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगाया था, साथ ही पार्टी के चंदे में गड़बड़ियों का भी खुलासा किया था।

कपिल मिश्रा के इन आरोपों के बाद उन्हें AAP से मंत्री पद से हटा दिया गया और फिर पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। लेकिन कपिल ने चुप्पी साधने की बजाय सत्याग्रह किया और अपनी मां के माध्यम से केजरीवाल को पत्र लिखे, जिसमें उन्होंने पार्टी से बाहर किए जाने के बाद की अपनी निराशा व्यक्त की। यह पत्र भी खूब चर्चा में रहे थे।

AAP से बाहर क्यों किए गए थे कपिल मिश्रा?

मई 2017 में कपिल मिश्रा ने अरविंद केजरीवाल पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि केजरीवाल ने पार्टी को मिले चंदे की जानकारी छिपाई और फर्जी कंपनियों के जरिए चंदा लिया। उनका आरोप था कि पार्टी के विधायक और करीबी लोगों ने फर्जी कंपनियों के माध्यम से चुनावी चंदा प्राप्त किया और फिर उसे बैंक खातों में डाला।

कपिल मिश्रा ने जब ये आरोप लगाए, तो उनकी शिकायत एसीबी में दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया। AAP ने उनका बचाव करते हुए कहा कि कपिल मिश्रा अपना काम ठीक से नहीं कर रहे थे, और इसलिए उन्हें पार्टी से बाहर किया गया।

बीजेपी में प्रवेश और अब की स्थिति

2019 में कपिल मिश्रा ने AAP को छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का ऐलान किया। बीजेपी में उनका स्वागत जोरदार तरीके से किया गया, और वे पार्टी के हिंदुत्व के बड़े चेहरों में से एक माने जाने लगे। 2020 विधानसभा चुनाव में कपिल मिश्रा ने बीजेपी के टिकट पर करावल नगर विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार मनोज कुमार त्यागी को भारी अंतर से हराया। इसके बाद उनके राजनीतिक प्रभाव में और बढ़ोतरी हुई।

कपिल मिश्रा का राजनीतिक कद तेजी से बढ़ा और 2023 में उन्हें दिल्ली बीजेपी का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। उनके इस कदम ने साफ संकेत दे दिया था कि अब बीजेपी में उनका राजनीतिक भविष्य और भी मजबूत होने जा रहा है।

कपिल मिश्रा की राजनीति और हिंदुत्व

कपिल मिश्रा को बीजेपी में हिंदुत्व के बड़े चेहरे के रूप में देखा जाता है। वे अपनी स्पष्टवादिता और तीव्र बयानों के कारण हमेशा चर्चा में रहते हैं। दिल्ली दंगे के बाद उनका नाम और भी ज्यादा चर्चा में आया, जब उन्होंने हिंदूवादी नेता के तौर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई।

कपिल मिश्रा की राजनीति में हर कदम पर विवाद रहा है, लेकिन उनके समर्थकों का मानना है कि उन्होंने हमेशा अपने सिद्धांतों के लिए आवाज उठाई है। उनका नाम अब बीजेपी में बड़े नेताओं में शुमार होने लगा है और उनके भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

क्या कपिल मिश्रा की राजनीति में अब कोई नया मोड़ आएगा?

दिल्ली में बीजेपी की सत्ता में वापसी और कपिल मिश्रा की बढ़ती ताकत के बाद यह सवाल उठता है कि क्या वे आने वाले समय में पार्टी के बड़े पदों पर अपनी पकड़ और मजबूत करेंगे। क्या उनकी विवादित छवि पार्टी के लिए एक चुनौती बन सकती है, या फिर बीजेपी उन्हें एक नए राजनीतिक नेतृत्व के रूप में देखेगी? इन सवालों का जवाब भविष्य के चुनावों और घटनाओं से ही मिलेगा।

कपिल मिश्रा की राजनीतिक यात्रा से यह स्पष्ट है कि उन्होंने हर बार राजनीति की बदलती धारा में खुद को मजबूती से स्थापित किया है। उनके बयानों और कार्यों ने उन्हें राजनीति में एक अलग पहचान दिलाई है, जो अब दिल्ली की राजनीति का एक अहम हिस्सा बन चुका है।

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