क्या 6 साल पुरानी अदावत के चलते डोनाल्ड ट्रंप यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की से ले रहे हैं बदला?
26 जुलाई 2019 को यूक्रेन में एक बड़ा राजनीतिक बदलाव आया था, जब वोल्दोमीर जेलेंस्की ने पीटरो पोरशेंको को हराकर देश के नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। यह एक ऐतिहासिक जीत थी, जिसने न केवल यूक्रेन की राजनीति को नया मोड़ दिया, बल्कि अमेरिका और यूक्रेन के रिश्तों पर भी प्रभाव डाला। उस समय, शपथ ग्रहण के बाद, डोनाल्ड ट्रंप, जो अमेरिका के राष्ट्रपति थे, ने जेलेंस्की को फोन किया था। लेकिन उस फोन कॉल के बाद से ही दोनों नेताओं के रिश्ते में दरार आ गई और इसे लेकर कई तरह की सियासी चर्चाएं होने लगीं।
अब, जब डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अमेरिकी सत्ता में लौट चुके हैं, तो यूक्रेन शांति समझौते को लेकर उनके रुख में नया मोड़ देखा जा रहा है। लेकिन इसके साथ ही, वह राष्ट्रपति वोल्दोमीर जेलेंस्की पर दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं, जो पुराने मतभेदों की याद दिलाता है। क्या ये सब कुछ अब 6 साल पुरानी अदावत का बदला लेने की कोशिश है? यह सवाल अब हर किसी के मन में उठ रहा है।
जेलेंस्की और ट्रंप के रिश्तों की खटास की शुरुआत
2019 में, जब जेलेंस्की ने अपनी शपथ ली, तब ट्रंप ने उन्हें फोन किया था। कहा जाता है कि ट्रंप ने इस कॉल के दौरान जो बाइडेन, जो उस समय ट्रंप के प्रतिद्वंदी थे, के बारे में जानकारी मांगी थी। ट्रंप चाहते थे कि जेलेंस्की बाइडेन के खिलाफ कोई नकारात्मक जानकारी साझा करें, ताकि उसे अमेरिकी चुनाव में फायदा उठाया जा सके।
यह मामला बाद में अमेरिकी सीनेट में महाभियोग का कारण बना था। डेमोक्रेट्स सांसदों के हाथ यह बात लग गई, जिसके बाद ट्रंप के खिलाफ सियासी हलचल मच गई और अमेरिका में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया। हालांकि, ट्रंप महाभियोग से बच गए, लेकिन इस घटना के बाद उन्हें संविधान के उल्लंघन का आरोप झेलना पड़ा। इससे ट्रंप को राजनीतिक नुकसान हुआ और चुनाव में उन्हें हार का सामना भी करना पड़ा।
ट्रंप का नया रुख: क्या वे जेलेंस्की को निशाना बना रहे हैं?
अब जब ट्रंप एक बार फिर सत्ता में लौटे हैं, तो उन्होंने यूक्रेन के शांति समझौते पर काम शुरू कर दिया है। हालांकि, ट्रंप का रुख रूस के प्रति काफी नरम है, लेकिन वोल्दोमीर जेलेंस्की के प्रति उनकी आलोचना जारी है। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से जेलेंस्की को तानाशाह और अलोकप्रिय बताया है। यह बयान उन कड़ी टिप्पणियों में से एक है, जो ट्रंप ने जेलेंस्की के खिलाफ दी हैं।
यहां पर एक दिलचस्प बात सामने आती है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जिन चुनावों को यूक्रेन के लिए एक बड़ा मुद्दा बना दिया है, उन चुनावों के प्रति ट्रंप का समर्थन दिलचस्प है। लेकिन यह विरोधाभासी है कि पुतिन खुद उन चुनावों को वैध नहीं मानते हैं, जहां लोकतंत्र की कोई स्वतंत्रता नहीं है और जहां पुतिन के विरोधी अक्सर या तो मारे जाते हैं या जेल में बंद कर दिए जाते हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि ट्रंप लोकतंत्र की बातें क्यों कर रहे हैं, जबकि वह स्वयं लोकतंत्र के सवालों पर इतनी सतर्कता नहीं दिखा रहे हैं।
क्या ये सभी फैसले पुरानी राजनीतिक अदावत का परिणाम हैं?
ट्रंप का जेलेंस्की के प्रति लगातार बढ़ता दबाव और आलोचना इस बात का संकेत हो सकता है कि 2019 के बाद की यह राजनीति उनके पुराने व्यक्तिगत मतभेदों का परिणाम है। क्या ट्रंप अब जेलेंस्की से उस समय के सियासी नुकसान का बदला लेने की कोशिश कर रहे हैं? क्या यह उनका निजी द्वंद्व है, जो अब अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उजागर हो रहा है?
सवाल यह भी उठता है कि क्या ट्रंप, जो रूस के साथ नरम रुख अपनाते हैं, यूक्रेन को लेकर इतनी सख्ती क्यों दिखा रहे हैं। इस नाटक के केंद्र में केवल एक व्यक्ति है— वोल्दोमीर जेलेंस्की, जिनकी स्थिति अब पहले से कहीं ज्यादा जटिल हो चुकी है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या डोनाल्ड ट्रंप का यह रुख यूक्रेन के लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आएगा या फिर यह उनके पुराने मतभेदों और बदले की भावना से प्रेरित है। वोल्दोमीर जेलेंस्की इस राजनीतिक तूफान में अपनी स्थिति को कैसे संभालते हैं, यह भविष्य की राजनीति पर बड़ा प्रभाव डालने वाला हो सकता है।
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