April 17, 2026

उत्तर प्रदेश में शराब की दुकानों के लिए नई लॉटरी नीति: 55,000 करोड़ रुपये के राजस्व लक्ष्य के साथ पेश हुई सरकार की नई आबकारी नीति

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अब लोग शराब की दुकानें खोलने के लिए अपनी किस्मत आजमा सकते हैं, क्योंकि राज्य सरकार ने नई आबकारी नीति 2025-26 पेश की है, जिसके तहत ई-लॉटरी के जरिए शराब की दुकानों के लाइसेंस आवंटित किए जाएंगे। यह नीति न केवल राज्य के आर्थिक ढांचे को मजबूती देगी, बल्कि शराब की दुकानों का संचालन भी एक पारदर्शी और नियमबद्ध तरीके से होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में फरवरी में हुई योगी कैबिनेट की बैठक में इस नई नीति को मंजूरी दी गई थी, और राज्य सरकार का इस साल के लिए 55,000 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का लक्ष्य है, जो पिछले वर्ष से 4000 करोड़ रुपये अधिक है।

लॉटरी के जरिए मिलेगा लाइसेंस

नई आबकारी नीति के तहत अब शराब की दुकानें ऑनलाइन लॉटरी के जरिए आवंटित की जाएंगी, और पुराने लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। यह व्यवस्था पहले से अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए की गई है। 14 फरवरी 2025 से राज्य सरकार की वेबसाइट पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, और इच्छुक व्यक्ति इसमें एनरोल कर सकते हैं।

कंपोजिट और मॉडल दुकानों का आवंटन

योजना के तहत देसी शराब, कंपोजिट और मॉडल दुकानों के लिए लॉटरी रजिस्ट्रेशन शुरू किया गया है। लखनऊ के जिला आबकारी अधिकारी करुणेंद्र सिंह के मुताबिक, 2025-26 के वित्तीय वर्ष में कुल 1071 दुकानों का आवंटन किया जाएगा। इनमें देसी शराब, मॉडल शॉप, और कंपोजिट दुकानें शामिल हैं। हालांकि, इस बार लखनऊ में पिछले साल की तुलना में 49 दुकानें कम आवंटित की जाएंगी। 2024-25 में जहां 1120 शराब की दुकानें थीं, वही इस बार 1071 दुकानों के लिए लॉटरी निकाली जाएगी।

लॉटरी रजिस्ट्रेशन की तिथियां और प्रक्रिया

लॉटरी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 14 फरवरी 2025 से शुरू हो चुकी है, और इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 27 फरवरी 2025 तक है। इच्छुक व्यक्तियों को सरकारी वेबसाइट exciseelotteryup.upsdc.gov.in पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होगा। इस दौरान सभी आवेदकों को अपना पैन नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा।

कौन कर सकता है आवेदन और फीस का विवरण

नई नीति के तहत कोई भी जिले का निवासी इस लॉटरी प्रक्रिया में भाग ले सकता है। आवेदक एक बार में अधिकतम दो दुकानों का ही आवंटन प्राप्त कर सकेगा। इस बार का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब केवल व्यक्तिगत आवेदक ही शराब की दुकान के लिए आवेदन कर सकते हैं, जबकि बड़ी कंपनियां और निजी फर्म इस लॉटरी प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकतीं। इसके अलावा, आवेदन करते समय आवेदकों को नॉन-रिफंडेबल एप्लीकेशन प्रोसेसिंग फीस का भुगतान भी करना होगा। यह फीस 40,000 रुपये से लेकर 1,00,000 रुपये तक हो सकती है, जो कि दुकान के प्रकार पर निर्भर करेगी।

राजस्व लक्ष्य और राज्य के आर्थिक लाभ

उत्तर प्रदेश सरकार की यह नई आबकारी नीति राज्य के लिए आर्थिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। सरकार ने 2025-26 के वित्तीय वर्ष में आबकारी से 55,000 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य रखा है, जो पिछले साल से 4000 करोड़ रुपये अधिक है। यदि सरकार अपने लक्ष्य को हासिल कर लेती है, तो यह राज्य के विकास में एक महत्वपूर्ण योगदान देगा और सरकारी खजाने को मजबूत करेगा।

समाप्ति और भविष्य की दिशा

इस नई नीति के जरिए शराब की दुकानों का संचालन अब और भी पारदर्शी तरीके से होगा। ई-लॉटरी के माध्यम से आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शराब की दुकानों का लाइसेंस सिर्फ योग्य व्यक्तियों को ही मिले। राज्य सरकार के लिए यह एक बड़े कदम का हिस्सा है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा मिल सकती है। अब देखना यह होगा कि लॉटरी के जरिए आवंटित दुकानों के संचालन में किस हद तक सफलता मिलती है और क्या यह योजना राज्य के राजस्व लक्ष्य को हासिल कर पाती है।

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