मणिपुर में राजनीतिक संकट गहराया, राष्ट्रपति शासन की आशंका बढ़ी!
मणिपुर में जारी हिंसा और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राज्य में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। फिलहाल वे कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, लेकिन सरकार गठन को लेकर अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, विधानसभा की दो बैठकों के बीच अधिकतम 6 महीने का अंतर होना चाहिए, जो आज समाप्त हो रहा है। ऐसे में अगर बीजेपी कोई नया नेतृत्व तय नहीं करती और विधानसभा सत्र नहीं बुलाया जाता, तो राज्य में राष्ट्रपति शासन की राह खुल सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार मणिपुर में सरकार गठन की दिशा में कोई कदम नहीं उठाने वाली है, जिससे राष्ट्रपति शासन लागू होने की संभावना और प्रबल हो गई है। हालांकि, कुछ कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि 6 महीने की अवधि बीतने के बावजूद विधानसभा को तुरंत भंग करना अनिवार्य नहीं है।
सरकार गठन को लेकर प्रयास अभी जारी हैं, लेकिन अगर कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तो अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे से लौटने के बाद लिया जा सकता है।
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