भारत में बच्चों में कैंसर के बढ़ते मामलों को लेकर डॉक्टरों ने दी चेतावनी, जानें क्या हैं लक्षण और इलाज के नए तरीके!
भारत में कैंसर के मामलों में हर साल इज़ाफा हो रहा है, और अब यह बीमारी बच्चों को भी अपनी चपेट में ले रही है। बच्चों में होने वाले कैंसर को ‘पीडियाट्रिक कैंसर’ कहा जाता है, और इसमें अधिकतर मामले जेनेटिक कारणों से होते हैं। इन बीमारियों में सबसे सामान्य है ब्लड कैंसर, जिसे ल्यूकेमिया कहा जाता है। विशेष रूप से, डाउन सिंड्रोम और एटैक्सिया टेलैंजिएक्टेसिया जैसी जेनिटिक समस्याएं बच्चों में ल्यूकेमिया का कारण बन सकती हैं। हालांकि, अगर इस बीमारी का सही समय पर पता लगाया जाए तो इलाज संभव है, और शुरुआती पहचान इस बीमारी के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कैंसर के मामले में समय पर पहचान क्यों है जरूरी?
पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी और हेमेटोलॉजी की डायरेक्टर डॉ. ऊष्मा सिंह के मुताबिक, बच्चों में कैंसर की पहचान समय रहते कर पाना बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, कैंसर के मामलों में शुरुआत में लक्षणों की पहचान करना काफी मुश्किल हो सकता है, लेकिन अगर जल्दी पहचान की जाए तो इलाज ज्यादा प्रभावी होता है। बच्चों में कैंसर के मामलों में बहुत सी जटिलताएं हो सकती हैं, इसलिए इस रोग की शुरुआती अवस्था में पहचान ही सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
बच्चों में कैंसर के प्रकार:
बच्चों में कैंसर के कई प्रकार होते हैं। इनमें सबसे आम हैं ल्यूकेमिया, जो कि दो प्रकार के होते हैं:
- एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (ALL)
- एक्यूट मायलोइड ल्यूकेमिया (AML)
इसके अलावा, मेडुलोब्लास्टोमा और ग्लियोमास भी बच्चों में होने वाले आम कैंसर के प्रकार हैं। इसके अलावा, बच्चों में न्यूरोब्लास्टोमा, लिम्फोमा, रैबडोमायोसारकोमा, और अस्थि कैंसर के भी मामले सामने आते हैं।
बच्चों में कैंसर के कारण:
डॉ. ऊष्मा सिंह के अनुसार, बच्चों में कैंसर के अधिकतर मामले जेनेटिक कारणों से होते हैं। इसके अलावा, खराब लाइफस्टाइल, खानपान की गलत आदतें और बढ़ता मोटापा भी बच्चों में कैंसर के कारण बन सकते हैं। इस बढ़ते खतरे को देखते हुए, बच्चों के स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
बच्चों में कैंसर के लक्षण:
कैंसर के लक्षण बच्चों में शुरूआत में सामान्य हो सकते हैं, जिससे इसका पता लगाना मुश्किल हो सकता है। फिर भी, बच्चों में कैंसर के कुछ सामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है:
- बार-बार बुखार आना
- वजन कम होना
- शरीर में खून की कमी होना
- भूख कम लगना
- शरीर के किसी हिस्से में गांठ का बनना
इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ करना बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है, इसलिए यदि इनमें से कोई लक्षण दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
कैंसर का इलाज और हालिया प्रगति:
पीडियाट्रिक कैंसर के इलाज में हाल ही में काफी प्रगति हुई है। अब इम्यूनोथेरेपी और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट जैसे उपचारों से कैंसर का इलाज किया जा रहा है। इसके अलावा, ड्रग थेरेपी और CAR T-सेल थेरेपी का भी प्रयोग बच्चों में कैंसर के इलाज में बढ़ चुका है, और इसके परिणाम भी बेहतर आ रहे हैं।
ब्लड कैंसर के मामलों में अब स्टेम सेल ट्रांसप्लांट की सफलता दर में इज़ाफा हुआ है, हालांकि डोनर की कमी अब भी एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए समाज में जागरूकता फैलाने की जरूरत है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग स्टेम सेल डोनेशन के लिए आगे आएं और इस तरह बच्चों का इलाज संभव हो सके।
निष्कर्ष:
बच्चों में कैंसर के बढ़ते मामलों को देखकर यह साफ है कि बीमारी का पता लगाने और उपचार की दिशा में समय रहते कदम उठाना बेहद जरूरी है। डॉक्टरों की सलाह है कि अगर किसी बच्चे में कैंसर के लक्षण दिखाई दें, तो उसे नजरअंदाज न करें और तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें। साथ ही, जीवनशैली में बदलाव और सही खानपान भी कैंसर के जोखिम को कम कर सकते हैं।
Share this content:
