April 17, 2026

प्रयागराज महाकुंभ 2025: आस्था का ज्वार, व्यवस्था की परीक्षा

कभी रुकी हुई गाड़ियों की अंतहीन कतारें, तो कभी पैदल चलते श्रद्धालुओं का सैलाब…
सड़कों पर रेंगती गाड़ियां, हाईवे पर जाम और रेलवे स्टेशनों पर उमड़ती भीड़…
धूल, धुएं और धक्का-मुक्की के बीच भी भक्तों का उत्साह चरम पर…

प्रयागराज महाकुंभ 2025 अपने चरम पर है, और इसके साथ ही संगम नगरी का जनसैलाब भी अपनी सीमाएं तोड़ चुका है। मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी जैसे अमृत स्नानों के बीत जाने के बाद उम्मीद थी कि भीड़ कुछ कम होगी, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। नागा साधुओं की विदाई के बावजूद, कुंभ में श्रद्धालुओं का रेला थमने का नाम नहीं ले रहा।

भीड़ और वीआईपी मूवमेंट ने बढ़ाई परेशानी

5 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संगम स्नान के बाद वीआईपी मूवमेंट और तेज हो गया। संगम क्षेत्र में पहले जहां आम श्रद्धालुओं का हुजूम था, अब वहां हर दिन कोई न कोई वीवीआईपी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। प्रशासन ने पहले 5 फरवरी तक वीआईपी प्रोटोकॉल पर रोक लगाई थी, लेकिन अब यह फिर से लागू हो गया है, जिससे शहर में जाम और अव्यवस्था बढ़ती जा रही है।

स्थानीय लोग परेशान, सड़कों पर रेंग रहीं गाड़ियां

स्थानीय नागरिकों के लिए प्रयागराज की सड़कों पर चलना एक बड़ी चुनौती बन चुका है। प्रयागराज संगम स्टेशन को भारी भीड़ के कारण अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है, जिससे यात्री अब प्रयागराज जंक्शन और अन्य स्टेशनों पर ट्रेन पकड़ने के लिए मजबूर हैं। मेला क्षेत्र तक पहुंचने के लिए 20-25 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ रहा है।

144 साल बाद बने इस विशेष संयोग ने महाकुंभ में श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर पहुंचा दिया है। शहर से जुड़े प्रमुख हाईवे और अंदरूनी सड़कों पर लंबा जाम लगा हुआ है। वाहन रेंग रहे हैं, बच्चे और महिलाएं घंटों इंतजार कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई है।

इमरजेंसी प्लान लागू, फिर भी हालात बेकाबू

मौनी अमावस्या के दौरान रेलवे और प्रशासन ने जिस इमरजेंसी प्लान को लागू किया था, उसे रविवार शाम को फिर से सक्रिय करना पड़ा। प्रयागराज जंक्शन पर भीड़ बढ़ने लगी तो यात्रियों को डायवर्ट कर खुसरोबाग ले जाया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए विशेष ट्रेनों की संख्या भी बढ़ा दी गई।

मकर संक्रांति पर 101 विशेष ट्रेनें चलाई गई थीं, जबकि रविवार को इस संख्या को बढ़ाकर 107 कर दिया गया। बावजूद इसके, संगम रेलवे स्टेशन को भीड़ के दबाव को कम करने के लिए 14 फरवरी तक बंद करना पड़ा। रेलवे प्रशासन ने यह निर्णय स्थानीय प्रशासन के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया।

हाईवे पर लगा जाम, प्रशासन के इंतजाम फेल?

प्रयागराज को जोड़ने वाले सभी प्रमुख हाईवे पूरी तरह से जाम की चपेट में हैं। वाराणसी, जौनपुर, मिर्जापुर, कौशांबी, प्रतापगढ़, रीवा और कानपुर जाने वाले रास्तों पर वाहनों की लंबी कतारें लगी हैं। हाईवे किनारे बनाए गए पार्किंग स्थल पूरी तरह फुल हो चुके हैं। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि सिविल पुलिस, ट्रैफिक पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती करनी पड़ी है।

भीषण जाम के पीछे ये 3 बड़े कारण

1. पार्किंग संकट:
शुरुआत में 102 पार्किंग स्थल बनाए गए थे, लेकिन तीन प्रमुख स्नान पर्वों के बाद इनकी संख्या घटाकर 36 कर दी गई। उम्मीद थी कि भीड़ कम होगी, लेकिन तीर्थयात्रियों का सैलाब अब भी जारी है। सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ने से जाम की स्थिति बनी हुई है।

2. तालमेल की कमी:
अमृत स्नानों के दौरान प्रशासन ने पड़ोसी जिलों के साथ मिलकर भीड़ को नियंत्रित किया था, लेकिन अब वाहनों को बॉर्डर पर रोकने की कोई योजना नहीं है। इससे प्रयागराज शहर पर दबाव बढ़ता जा रहा है। अब प्रशासन समीपवर्ती जिलों को वाहनों की एंट्री रोकने के लिए अलर्ट भेज रहा है।

3. जानकारी का अभाव:
मेला क्षेत्र में ड्यूटी पर लगाए गए पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के जवान दूसरे राज्यों या शहरों से आए हुए हैं। उन्हें प्रयागराज की भौगोलिक स्थिति का ज्यादा ज्ञान नहीं है। जब श्रद्धालु रास्ता पूछते हैं, तो उन्हें बस “आगे बढ़ते रहिए” जैसा जवाब मिलता है, जिससे भ्रम की स्थिति और बढ़ जाती है।

माघी पूर्णिमा स्नान 12 फरवरी को है, और प्रशासन को उम्मीद है कि तब तक ऐसी ही स्थिति बनी रहेगी। कुंभ मेला हर बार एक आस्था और व्यवस्था की परीक्षा बनकर सामने आता है। इस बार भी प्रशासन के सामने चुनौतियां बड़ी हैं, लेकिन सवाल ये है कि क्या इंतजामों में सुधार होगा, या फिर श्रद्धालुओं को अपनी आस्था की राह में खुद ही रास्ता बनाना पड़ेगा?

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!