बांग्लादेश में ऐतिहासिक धरोहर पर हमले से तनाव, भारत की प्रतिक्रिया को लेकर विवाद
ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान के ऐतिहासिक आवास को ध्वस्त किए जाने को लेकर बांग्लादेश और भारत के बीच कूटनीतिक तनातनी बढ़ गई है। ढाका में इस घटना के बाद भड़की हिंसा के बीच भारत की आलोचना को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने अप्रत्याशित और अनुचित करार दिया।
क्या है पूरा मामला?
बुधवार रात से बांग्लादेश में हिंसा जारी है, जहां प्रदर्शनकारियों ने ढाका स्थित 32 धानमंडी आवास में आग लगा दी। यही वह स्थान था, जहां से शेख मुजीबुर रहमान ने 1971 में पाकिस्तान से बांग्लादेश की स्वतंत्रता की घोषणा की थी। इस ऐतिहासिक घर को बाद में स्मारक में बदल दिया गया था, लेकिन अब इसके ध्वस्त किए जाने से देशभर में आक्रोश है।
भारत ने जताया कड़ा विरोध
इस घटना पर भारत ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शेख मुजीबुर रहमान का आवास बर्बरता का शिकार हुआ है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा,
“यह खेदजनक है कि बांग्लादेश की स्वतंत्रता संग्राम के प्रतीक रहे इस ऐतिहासिक आवास को 5 फरवरी को नष्ट कर दिया गया।”
बांग्लादेश ने भारत की टिप्पणी को बताया अनुचित
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने रविवार को भारत की प्रतिक्रिया पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह मामला देश का आंतरिक मामला है और भारत को इस पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद रफीकुल आलम ने कहा,
“हम अपने आंतरिक मामलों पर किसी भी देश की टिप्पणी को उचित नहीं मानते, और हम उम्मीद करते हैं कि अन्य देश भी इसी कूटनीतिक शिष्टाचार का पालन करेंगे।”
क्या यह मुद्दा दोनों देशों के संबंधों पर असर डालेगा?
शेख मुजीबुर रहमान भारत-बांग्लादेश के संबंधों की नींव के प्रतीक माने जाते हैं। ऐसे में उनके आवास के ध्वस्त होने और इस पर भारत की प्रतिक्रिया को लेकर पैदा हुए विवाद से दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों में खटास आने की आशंका जताई जा रही है। अब देखना होगा कि ढाका और नई दिल्ली इस संवेदनशील मामले को
कैसे संभालते हैं।
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