April 17, 2026

संभल हिंसा: भ्रामक वीडियो फैलाने वाले आरोपी युवक की गिरफ्तारी, पुलिस की कार्रवाई जारी

संभल (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के संभल जिले में हाल ही में हुए हिंसा के संदर्भ में सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो फैलाने वाले एक आरोपी युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी युवक ने संभल की जामा मस्जिद में तोड़फोड़ के फर्जी वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड किया था, जिसके बाद पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी थी। आरोपी को हरियाणा के नूह जिले के मसूत गांव से गिरफ्तार किया गया है। साइबर क्राइम पुलिस की मुस्तैदी और तत्परता ने आरोपी को पकड़ने में अहम भूमिका निभाई।

यह मामला उस समय सामने आया जब आरोपी युवक मोमिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो अपलोड किया, जिसमें संभल जामा मस्जिद में कथित तोड़फोड़ की घटना को दिखाया गया था। वीडियो में किसी प्रकार का हिंसा या तोड़फोड़ का दावा किया गया था, लेकिन यह पूरी तरह से भ्रामक और फर्जी था। वीडियो के वायरल होते ही पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच शुरू कर दी थी।

साइबर क्राइम पुलिस की सक्रियता और तकनीकी अनुसंधान के बाद आरोपी की पहचान की गई। आरोपी युवक मोमिन, जो हरियाणा के नूह जिले के मसूत गांव का निवासी है, को पुलिस ने 6 दिसंबर 2024 को दर्ज की गई शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया। युवक ने जिस वीडियो को यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया था, वह संभल की जामा मस्जिद में तोड़फोड़ के संबंध में था, जो पूरी तरह से गलत था और सांप्रदायिक माहौल को बिगाड़ने के लिए फैलाया गया था।

पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की और उसे हरियाणा के नूह जिले से गिरफ्तार किया। अब आरोपी को कानूनी कार्रवाई के बाद न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि वे ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहे हैं जो सोशल मीडिया का दुरुपयोग करते हुए समाज में अशांति फैलाने की कोशिश करते हैं।

संभल हिंसा का मामला पहले ही व्यापक विवाद का कारण बन चुका है। नवंबर 2024 में शाही मस्जिद के सर्वे के दौरान पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच हुई झड़पों ने हिंसक रूप ले लिया था। इस संघर्ष में पांच लोगों की मौत हो गई थी, और कई पुलिसकर्मी भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पुलिस ने इस मामले में पहले ही चार महिलाओं सहित 75 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया था और उन्हें जेल भेज दिया था।

इस घटना के बाद पुलिस ने कई उपद्रवियों की तस्वीरें भी जारी की थीं, जिनका आरोप था कि वे दंगों में शामिल थे या फिर माहौल को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस की जांच और सख्त कार्रवाई जारी है, और अब सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रामक वीडियो के मामले में भी सख्ती से काम किया जा रहा है।

पुलिस का कहना है कि वे सोशल मीडिया के जरिए समाज में तनाव फैलाने वाले तत्वों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी जो देश की शांति और सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे हैं।

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