लखनऊ-दिल्ली में रोहतास ग्रुप पर ईडी का छापा, ₹248 करोड़ के घोटाले की जांच तेज
लखनऊ में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रियल एस्टेट कंपनी रोहतास ग्रुप के ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई की है। बुधवार को लखनऊ के छह और दिल्ली के दो स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई, जिसमें लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए। ग्रुप पर करीब ₹248 करोड़ के घोटाले का आरोप है और यह मामला अब मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट (पीएमएलए) के तहत जांच के दायरे में है।
ईडी के अनुसार, रोहतास ग्रुप के प्रमोटर पीयूष रस्तोगी, परेश रस्तोगी और दीपक रस्तोगी पिछले चार साल से फरार हैं। उन्हें कई बार समन भेजा गया, लेकिन वे जांच में पेश नहीं हुए। इस कारण एजेंसी को सबूत जुटाने और संपत्तियों को अटैच करने में दिक्कतें आ रही थीं। इसी के चलते ईडी ने बुधवार को यह व्यापक छापेमारी की, ताकि अपराध से अर्जित संपत्ति का पता लगाया जा सके।
छापेमारी के दौरान 14 मदन मोहन मालवीय मार्ग स्थित प्रमोटर के घर समेत कई ठिकानों पर ईडी टीमों ने गहन तलाशी ली। वहां मौजूद लोगों से लंबी पूछताछ भी की गई। एजेंसी को उम्मीद है कि बरामद दस्तावेज और डिजिटल डेटा से घोटाले की परतें खुलेंगी और आगे की कार्रवाई के लिए ठोस आधार मिलेगा।
इस मामले की जड़ें 2021 से जुड़ी हैं, जब घर खरीदारों और निवेशकों ने रोहतास ग्रुप के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवानी शुरू की थी। आरोप था कि कंपनी ने तय समय पर संपत्तियों की डिलिवरी नहीं दी, साथ ही एक ही संपत्ति को अलग-अलग लोगों को बेच दिया। अब तक ग्रुप के खिलाफ कुल 87 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें धोखाधड़ी और गबन के गंभीर आरोप शामिल हैं।
ईडी का मानना है कि रोहतास ग्रुप ने निवेशकों और खरीदारों के पैसे का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं कीं। इस छापेमारी के बाद एजेंसी संपत्तियों को अटैच करने की प्रक्रिया तेज करेगी और फरार प्रमोटरों की तलाश के लिए कानूनी कदम भी बढ़ाएगी।
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