दिल्ली में सत्ता का संग्राम: क्या खत्म होगा बीजेपी का वनवास या आम आदमी पार्टी बनाएगी हैट्रिक?
नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे धीरे-धीरे साफ हो रहे हैं, लेकिन शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) बढ़त बनाती नजर आ रही है। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी (आप) पिछड़ती दिख रही है, जिससे सत्ता परिवर्तन की अटकलें तेज हो गई हैं। वहीं, कांग्रेस इस चुनाव में अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ती दिखाई दे रही है।
सुबह 9 बजे तक के रुझानों के अनुसार, कांग्रेस महज दो सीटों पर बढ़त बनाए हुए थी, जबकि कुल 70 विधानसभा सीटों में बहुमत के लिए 36 का आंकड़ा छूना अनिवार्य है। दिलचस्प बात यह रही कि मतगणना शुरू होने के बावजूद दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय सुबह 8:40 बजे तक बंद पड़ा रहा, जो पार्टी के मनोबल को लेकर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि क्या नतीजे कांग्रेस के लिए कोई नई उम्मीद लेकर आते हैं या पिछले दो विधानसभा चुनावों की तरह पार्टी इस बार भी सिफर पर सिमट जाएगी।
27 साल से दिल्ली में सत्ता से बाहर बीजेपी
दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे यह तय करेंगे कि आम आदमी पार्टी लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटेगी या फिर बीजेपी 27 साल का राजनीतिक वनवास खत्म कर राजधानी की सत्ता पर काबिज होगी। बीजेपी 1998 के बाद से दिल्ली की सत्ता से बाहर है, जबकि आम आदमी पार्टी पिछले दस वर्षों से सरकार चला रही है।
इस चुनाव से पहले कई एग्जिट पोल्स में बीजेपी को बढ़त मिलती दिखाई गई थी, जिससे आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया था कि यह एक राजनीतिक चाल है ताकि उनके विधायकों पर दबाव बनाया जा सके और उन्हें तोड़ा जा सके। अब मतगणना के दौरान जो रुझान सामने आ रहे हैं, वे क्या इस दावे को सच साबित करेंगे या फिर आम आदमी पार्टी आखिरी क्षणों में वापसी करेगी, यह देखना दिलचस्प होगा।
कांग्रेस की हालत बदतर, पार्टी का भविष्य अधर में
दिल्ली में कांग्रेस कभी अजेय मानी जाती थी। 1998 से 2013 तक लगातार पंद्रह वर्षों तक सत्ता में रही शीला दीक्षित के नेतृत्व में पार्टी ने विकास का नया मॉडल पेश किया था। लेकिन 2013 के बाद कांग्रेस का पतन इतना तेज हुआ कि 2015 और 2020 के चुनावों में उसका खाता भी नहीं खुला।
इस बार राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने जमकर प्रचार किया, लेकिन क्या उनका प्रयास कांग्रेस के लिए कोई करिश्मा कर पाएगा? या फिर पार्टी को एक बार फिर निराशा हाथ लगेगी? इस चुनाव के नतीजे सिर्फ कांग्रेस के लिए ही नहीं, बल्कि विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के लिए भी महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि दिल्ली में कांग्रेस की स्थिति कहीं न कहीं राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित कर सकती है।
आम आदमी पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती
आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में अपने शासनकाल के दौरान शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े सुधार किए, जिनका उसने चुनाव प्रचार में जमकर इस्तेमाल किया। लेकिन बीजेपी ने इस बार राष्ट्रवाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को केंद्र में रखते हुए आक्रामक प्रचार किया, जिससे चुनावी लड़ाई बेहद रोचक हो गई।
अगर आम आदमी पार्टी सत्ता बचाने में कामयाब नहीं होती है, तो यह उनके लिए एक बड़ा झटका होगा और देश की राजनीति में नए समीकरण उभर सकते हैं। वहीं, अगर बीजेपी 27 साल बाद सत्ता में आती है, तो यह उनके लिए ऐतिहासिक जीत होगी।
अब सबकी निगाहें मतगणना के अंतिम नतीजों पर टिकी हैं। क्या दिल्ली एक बार फिर केजरीवाल को मौका देगी, या फिर भगवा परचम लहराएगा? कांग्रेस के लिए इस चुनाव में क्या बचा है? इन सभी सवालों के जवाब आने वाले कु
छ घंटों में मिल जाएंगे।
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